कीर्तन 1–50
कीर्तन 17 · Kirtan 17
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जय हो युगल नवल सरकार, बलिहार बलिहार।
इक गौर वरन तन धार, बलिहार बलिहार।
इक नीलकमल अनुहार, बलिहार बलिहार।
इक अति भोरी सरकार, बलिहार बलिहार।
इक नटखट नट अनुहार, बलिहार बलिहार।
इक मेरी सीधी सादी सरकार, बलिहार बलिहार।
इक मेरे टेढ़े मेढ़े सरकार, बलिहार बलिहार।
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इक नृपवृषभानुदुलार, बलिहार बलिहार।
इक गोकुल ग्वाल गँवार, बलिहार बलिहार।
इक छवि सोरह शंृगार, बलिहार बलिहार।
इक नटवर भेष सँवार, बलिहार बलिहार।
इक नागरि भानुदुलार, बलिहार बलिहार।
इक नागर नंदकुमार, बलिहार बलिहार।
इक प्रेम रूप साकार, बलिहार बलिहार।
इक रसिकन को सरदार, बलिहार बलिहार।
इक संग अगनित ब्रजनार, बलिहार बलिहार।
इक संग रह ग्वार गमार, बलिहार बलिहार।
इक मोहन मोहनहार, बलिहार बलिहार।
इक मदन विमोहनहार, बलिहार बलिहार।
इक ब्रजरस की दातार, बलिहार बलिहार।
इक ब्रजरस याचनहार, बलिहार बलिहार।
इक प्रेम रूप रस सार, बलिहार बलिहार।
इक रसिक भ्रमर अनुहार, बलिहार बलिहार।
इक आत्मा नंदकुमार, बलिहार बलिहार।
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इक सेवक कीर्ति कुमार, बलिहार बलिहार।
इक बाँटत केवल प्यार, बलिहार बलिहार।
इक कर असुरन संहार, बलिहार बलिहार।
इक बनि गये नंदकुमार, बलिहार बलिहार।
इक बनि गई भानुदुलार, बलिहार बलिहार।
