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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 55 · 59/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 55 · Kirtan 55

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

15 source linesपुस्तक पृष्ठ 109–110PDF 120–121

जय बरसाने वारी प्यारी,

(जय नँदनंदन सुखधाम हरे)

जय बरसाने वारी प्यारी,

जय ऊँचे महल अटावारी।

भोरी भारी वृषभानुदुलारी प्यारी,

जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी।

पिय को बुरा न कहो बुरा माने प्यारी,

दोऊ एक थे हैं रहेंगे भी पिय प्यारी।

जय नथबेसर वारी प्यारी,

जय जय मादन ब्रजरसवारी।

जय महाभाव रूपिणि प्यारी,

जय जाकर चाकर बनवारी।

जय प्रियतम पर वारी प्यारी,

जय प्रियतम प्यारी पर वारी।

Source page 110

जय पिय ते अति कृपालु प्यारी,

जय कछु “कृपालु” हैं वनवारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३059
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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