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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 9 · 13/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 9 · Kirtan 9

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 14PDF 25

कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी।

(गोविन्दा गोविन्दा . . .)

कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी।

तू ही मेरी साँचि महतारी, तूने कहा श्रुति महँ प्यारी।

तेरा मन है कृपा का प्यारी, तेरा तन है कृपा का प्यारी।

तेरी कृपा तो कृपा है प्यारी, तेरा कोप भी कृपा है प्यारी।

तेरी कृपा चह बनवारी, तेरी कृपा की है बलिहारी।

तेरी कृपा ते ही बनवारी, करें जीवों पर कृपा प्यारी।

कृपा पर कृपा करें प्यारी, ऐसी कृपा पर वारी वारी।

जापै टुक कृपा करें प्यारी, वाके पाछे डोलें बनवारी।

सुनि कृपा का विरद प्यारी, तेरे द्वार भीड़ भारी प्यारी।

कोउ हो या ना हो अधिकारी, सब पर कृपा करें प्यारी।

मुझ पर कृपा करु प्यारी, तब जानूँ तू कृपालु प्यारी।

तू कृपा ते न अघाति प्यारी, तेरा रोम रोम कृपा प्यारी।

तेरा मन इन्द्रिय प्यारी, कृपा सोचे कृपा करे प्यारी।

तू तो खाते पीते सोते प्यारी, सोचे कृपा कृपा कृपा प्यारी।

कृ पा करू बरसाने वारी, रहूँगा कृपा का आभारी।

तेरी कृपा पाके पिय प्यारी, बनि गये हैं “कृपालु” प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३013
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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