(मेरो प्यारो प्यारो...)
रस बरसाने वारी प्यारी,
मम स्वामिनी बरसाने वारी।
मेरी प्यारी प्यारी भोरी भारी,
जापर बनवारी बलिहारी।
मेरी प्यारी ऐसी प्यारी,
बनवारी हूँ वारी-वारी।
ब्रजरस टपकत रोम रोम प्यारी,
पियें बड़भागी ब्रजनारी बनवारी।
मेरी प्यारी छवि अस प्यारी प्यारी,
प्यारी हूँ जायँ वारी-वारी।
मेरी प्यारी जू की छवि एतिक प्यारी,
चोरी चोरी लखें पिय डरि बनवारी।
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मेरी प्यारी जू की छवि एतिक प्यारी,
लखि गिरें मुरछित छिति बनवारी।
मेरी प्यारी जू की छवि एतिक प्यारी,
नजर उतारें राई नोन बनवारी।
मेरी प्यारी जू की छवि एतिक प्यारी,
प्यारी माथे काला टीका देय बनवारी।
मेरी प्यारी जू की छवि एतिक प्यारी,
भुजन उठाय बोलें पिय बलिहारी।
जब जब निकसत प्यारी सवारी,
पाछे चलि बोले ब्रह्म जय हो जय हो प्यारी।
जय हो जय हो जय हो प्यारी,
बलिहारी तेरी बलिहारी।
जहँ जहँ चरण धरत मम प्यारी,
तहँ तहँ सिर धर कुंजबिहारी।
लखि सखियन पग चापति प्यारी,
पिय कह धनि धनि धनि ब्रजनारी।
रास करन जब चल बनवारी,
मुकुट धरत प्रथमहिं पग प्यारी।