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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 54 · 58/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 54 · Kirtan 54

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

15 source linesपुस्तक पृष्ठ 108–109PDF 119–120

प्यारी प्यारी भोरी भारी नथवारी प्यारी,

(जय नँदनंदन सुखधाम ....)

प्यारी प्यारी भोरी भारी नथवारी प्यारी,

जय हो जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी।

वृषभानुदुलारी सुकुमारी प्यारी,

तोपै वारी वारी वारी महलन वारी।

तेरे पाछे पाछे डोले बनवारी प्यारी,

तेरी बलिहारी बलिहारी बलिहारी।

जब जब निकसत प्यारी असवारी,

पाछे चलि बोले बनवारी जय हो प्यारी।

जब सखिन पलोटति पग प्यारी,

लखि कर मींजत पिय बनवारी।

Source page 109

आगे चलें प्यारी पाछे-पाछे ब्रजनारी,

वाके पाछे चलि पिय बोलें जय हो प्यारी।

पिय को बुरा न कहो बुरा माने प्यारी,

सुना है “कृपालु” दोउन भई यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३058
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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