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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 57 · 61/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 57 · Kirtan 57

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

18 source linesपुस्तक पृष्ठ 111–112PDF 122–123

राधे तोहिं भूलूँ नहिं कभू पल अाधे।

(नीको लागे . . .)

राधे तोहिं भूलूँ नहिं कभू पल अाधे।

मेरा सब कुछ तेरा दिया हुआ राधे।

तन ले ले मन ले ले धन ले ले राधे।

जनम जनम का भिखारी तोहिं का दे।

बरबस ले ले सब प्रेम सुधा दे।

भुक्ति मुक्ति माँगूँ नहिं प्रेम सुधा दे।

निज सेवा ना दे जो तो जन सेवा दे।

पिय सँग गलबाँही दै के दिखा दे।

ब्रजरस की इक बूँद पिला दे।

अधम उधारन विरद निभा दे।

तोहिं तजि जाऊँ कित नाम बता दे।

Source page 112

मुझ खोटे को खरों के सँग चला दे।

तू ही इक मेरी यह बोध करा दे।

छोड़ूँ नहिं पाछा चाहे चक्र चला दे।

तेरी दासी माया वाय डाटि भगा दे।

तोहिं दीन प्रिय मोहिं दीन बना दे।

अपने “कृपालु” को भी प्रेम दिला दे॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३061
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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