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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 85 · 89/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 85 · Kirtan 85

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 142PDF 153

श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी।

(गोविन्द जय जय गोपाल जय जय।)

श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी।

जब चह रास करन बनवारी, मुकुट उतारि धरत पग प्यारी।

सब जग वारी लखि बनवारी, बनवारी वारी लखि प्यारी।

सब जग आत्मा है बनवारी, बनवारी हूँ आत्मा प्यारी।

प्राण हमारो है बनवारी, प्राण प्राण है भानुदुलारी।

श्रुति कह रसस्वरूप बनवारी, रसिक बनाय दीन तिन प्यारी।

तबहि “कृपालु” भये बनवारी, जबहिं कृपा किय भानुदुलारी।।

जय राधे जय राधे राधे, प्रेम अगाधे जय राधे।

श्री राधे श्री राधे राधे, प्रेम अगाधे श्री राधे।

भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठहुँ ना दे, प्रेम सुधा दे श्री राधे।

रोकर गावो राधे राधे, देगी प्रेम सुधा राधे।

दर्शन दे या ना दे राधे, प्रेम सुधा दे श्री राधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३089
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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