कीर्तन 51–100
कीर्तन 85 · Kirtan 85
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी।
श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी।
जब चह रास करन बनवारी, मुकुट उतारि धरत पग प्यारी।
सब जग वारी लखि बनवारी, बनवारी वारी लखि प्यारी।
सब जग आत्मा है बनवारी, बनवारी हूँ आत्मा प्यारी।
प्राण हमारो है बनवारी, प्राण प्राण है भानुदुलारी।
श्रुति कह रसस्वरूप बनवारी, रसिक बनाय दीन तिन प्यारी।
तबहि “कृपालु” भये बनवारी, जबहिं कृपा किय भानुदुलारी।।
जय राधे जय राधे राधे, प्रेम अगाधे जय राधे।
श्री राधे श्री राधे राधे, प्रेम अगाधे श्री राधे।
भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठहुँ ना दे, प्रेम सुधा दे श्री राधे।
