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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 32 · 36/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 32 · Kirtan 32

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 78–79PDF 89–90

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

(प्यारी प्यारी भोरी ...)

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

सब मिलि बोलो जय हो जय हो राधेरानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

जाकी कोटि कमला भवानी नौकरानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

आँसू दै के लूटो बड़ी भोरी राधेरानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

मेरी राधेरानी जैसी मेरी राधेरानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

जाके डर डरें पूर्ण ब्रह्म चक्रपानी।

Source page 79

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

जाके पाछे पाछे डोलें सारंगपानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

विहरति नित वृन्दावन रजधानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

प्रेम भिखारी है “कृपालु” राधेरानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३036
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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