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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 74 · 78/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 74 · Kirtan 74

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 127–128PDF 138–139

मैं तो वारी बनवारी पर, वारी वारी वारी।

(मैं तो प्यारी प्यारी प्यारी पर वारी वारी जाऊँ)

मैं तो वारी बनवारी पर, वारी वारी वारी।

बनवारी मेरी प्यारी पर, वारी वारी वारी॥

मेरी प्यारी पर जो भी जाय वारी वारी वारी।

वा पै वारी बनवारी जाय वारी वारी वारी॥

Source page 128

जो भी मेरी प्यारी जू पै जाये वारी वारी वारी।

मैं तो वापै पुनि पुनि जाऊँ वारी वारी वारी।।

मेरी प्यारी पर जाये प्यारी वारी वारी वारी।

ऐसी प्यारी प्यारी प्यारी पर वारी वारी वारी॥

रस बरसाने वारी पर वारी वारी वारी।

बरसाने वारी प्यारी पर वारी वारी वारी॥

मैं तो प्यारीजू की यारी पर वारी वारी वारी।

मैं तो यार बनवारी पर वारी वारी वारी।।

आगे आगे प्यारी चलैं वाके पाछे ब्रजनारी।

वाके पाछे पाछे चलैं चोरी चोरी बनवारी।।

सोरहो सिंगार करि बैठे जब मेरी प्यारी।

सिर नीचे करि देखें चोरी चोरी बनवारी।।

जग मोहै मदन मदन मोहे बनवारी।

बनवारी हूँ को मोहिं एक चितवनि प्यारी।।

मैं तो वाई ब्रजरज पर वारी वारी वारी।

जाको प्यारी सिर डारे जायें वारी वारी वारी।।

हैं “कृपालु” ब्रज नर नारी प्यारी पर वारी।

कहँ लौं कहिय प्यारी पर प्यारीहूँ है वारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३078
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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