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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 110 · 114/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 110 · Kirtan 110

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

25 source linesपुस्तक पृष्ठ 176–177PDF 187–188

आजा आजा आजा कुंजबिहारी,

(मेरे प्रानन प्यारे आजा)

आजा आजा आजा कुंजबिहारी,

तोहिं परखत सब नर नारी।

तू तो व्यापक ब्रह्म बिहारी,

दे दे दरस परस बनवारी।

जय हो जय हो जय हो रास बिहारी,

बलिहारी बलिहारी बलिहारी।

(मेरे प्रानन प्यारे आजा)

राधेरानी, राधेरानी, राधेरानी, राऽऽधे राऽधे, राधेरानी।

महरानी राधेरानी वरदानी, प्रेमरूप ब्रज रस खानी।

महरानी राधारानी, प्रेमरूप रस खानि, वृन्दावन ठकुरानी।

प्यारी प्यारी भोरी भारी सुकुमारी,

नथबेसर वारी प्यारी।

वारी वारी, प्यारी प्यारी, भोरी भारी,

भानुदुलारी सुकुमारी।

Source page 177

बलिहारी बलिहारी नथवारी,

ऊँचे महल अटावारी।

जय हो प्रानन प्यारी, जय हो प्रानन प्यारी,

जय हो प्रानन प्यारी, बोलें बनवारी।

प्यारी प्यारी भोरी भारी सुकुमारी,

श्री वृषभानुदुलारी।

बलिहारी बलिहारी बलिहारी,

नथ बेसर वारी प्यारी।

महरानी राधारानी मादन प्रेम रूप ब्रजरस खाऽऽनी।

ठाकुर संग ठकुरानी विहरति श्री वृंदावन रजधानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३114
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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