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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 102 · 106/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 102 · Kirtan 102

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 166PDF 177

प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी।

( कृष्ण गोविन्द गोविन्द गोपाला.....)

प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी।

तोपै बलिहारी बलिहारी बलिहारी।

जापै सब जग वारी सोई बनवारी।

जापै बनवारीहूँ वारी सोई प्यारी।

जो भी बनवारी अरु प्यारी पर वारी।

मैं तो वापै जाऊँ पुनि पुनि वारी वारी।

प्यारी प्यारी भोरी भारी, ब्रजरस वारी प्यारी।

जय हो जय हो जय हो जय हो, बरसाने वारी प्यारी।

मैं तो वारी वारी, नथबेसर वारी प्यारी।

मेरी प्यारी अस प्यारी, वारी जायें आपु प्यारी।

बनवारी दें बुहारी, जेहि मग जायें प्यारी।

हैं बिहारी भी “कृपालु” पै “कृपालु” अति प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३106
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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