कीर्तन 101–125
कीर्तन 102 · Kirtan 102
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी।
( कृष्ण गोविन्द गोविन्द गोपाला.....)
प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी।
जापै बनवारीहूँ वारी सोई प्यारी।
जो भी बनवारी अरु प्यारी पर वारी।
मैं तो वापै जाऊँ पुनि पुनि वारी वारी।
प्यारी प्यारी भोरी भारी, ब्रजरस वारी प्यारी।
जय हो जय हो जय हो जय हो, बरसाने वारी प्यारी।
मैं तो वारी वारी, नथबेसर वारी प्यारी।
मेरी प्यारी अस प्यारी, वारी जायें आपु प्यारी।
