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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 46 · 50/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 46 · Kirtan 46

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

15 source linesपुस्तक पृष्ठ 99–100PDF 110–111

प्यारी प्यारी भोरी भारी प्यारी बरसाने वारी,

(कुंज कदंबनि डार)

प्यारी प्यारी भोरी भारी प्यारी बरसाने वारी,

रस बरसाने वारी प्यारी बरसाने वारी।

तू ही मेरी गति मति प्यारी बरसाने वारी,

दे दे मोहि महल टहल बरसाने वारी।

पाछा नहिं छोड़ू तेरा प्यारी बरसाने वारी,

प्यार करे या मारे प्यारी बरसाने वारी।

बड़ी आस लै के आई प्यारी बरसाने वारी,

दे दे या दिला दे प्रेम प्यारी बरसाने वारी।

झोली नहिं लाई संग प्यारी बरसाने वारी,

झोली भी दे भर भी दे प्यारी बरसाने वारी।

Source page 100

दर्शन दे या ना दे प्यारी बरसाने वारी,

दर्शन प्यास बढ़ा दे बरसाने वारी।

नाम को “कृपालु” मैं भी प्यारी बरसाने वारी,

याको प्यारी साँचु बना दे बरसाने वारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३050
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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