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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 116 · 120/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 116 · Kirtan 116

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 182–183PDF 193–194

प्यारी प्यारी भोरी भारी सुकुमारी,

(ओ माँ श्यामा . . .)

प्यारी प्यारी भोरी भारी सुकुमारी,

वारी वारी बरसाने वारी प्यारी।

जब जब चले प्यारी की सवारी,

पाछे चलि बोलें पिय जय हो प्यारी।

Source page 183

कभू बनवारी बनि जायँ प्यारी,

कभू प्यारी बनि जायँ बनवारी।

जय हो जय हो जय हो जय हो बनवारी,

जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो प्यारी।

प्यारी रोम रोम बोलें बनवारी,

बनवारी रोम रोम बोलें प्यारी।

सब जग आत्मा हैं बनवारी,

बनवारी हूँ की आत्मा हैं प्यारी।

सब जग के हैं स्वामी बनवारी,

बनवारी हूँ की स्वामिनि प्यारी।

सब जग को नचावें बनवारी,

बनवारी को नचावें मेरी प्यारी।

सब जग पै “कृपालु” बनवारी,

बनवारी पै कृपालु मेरी प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३120
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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