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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 87 · 91/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 87 · Kirtan 87

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 144PDF 155

प्यारी प्यारी भोरी भारी सुकुमारी प्यारी,

(अपनापन रखना . . .)

प्यारी प्यारी भोरी भारी सुकुमारी प्यारी,

बरसाने वारी प्यारी भानुदुलारी।

प्यारीजू की प्यारी छवि एतिक प्यारी।

निज परछाईं लखि प्यारी वारी वारी।

जब सिंहासन राजें सुकुमारी,

तब गोद धरि पद चापैं बनवारी।

जापै सब वारी सोऊ वारी बनवारी,

तोपै बलिहारी बलिहारी बलिहारी।

जब जब निकसत प्यारी की सवारी,

पाछे चलि पिय बोलें जय हो, जय हो, प्यारी।

सोरहो सिंगार करि बैठें जब प्यारी,

नीचे लखि माथे काला टीका दें बिहारी।

ब्रजरस चुये रोम रोम तनु प्यारी,

बड़भागी पियें छकि ब्रह्म बनवारी।

जब होड़ हो कृपा में पिय अरु प्यारी,

पिय हारें जीतें मो “कृपालु” सुकुमारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३091
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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