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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 28 · 32/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 28 · Kirtan 28

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

61 source linesपुस्तक पृष्ठ 62–65PDF 73–76

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,

(प्यारी प्यारी भोरी भारी )

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

एक भिखारी आया तेरे धाम राधे,

माँगे गोपियों सा प्रेम दे चाहे ना दे।

कालि भजु कालि भजु जनि करु आगे,

जाने कब काल लाल झंडी दिखा दे।

तू तो रही सदा ते ही कृपामयी राधे,

हमरीहिं बेर कृपण काहे राधे।

अब तो मैं तेरा पाछा छोडूँ नहिं राधे,

कान खोल सुनु मैं हठीला शिशु राधे।

तू ही मेरी थी भी है भी रहेगी भी राधे,

पाछा छोड़ूँ नहिं चाहे चक्र चला दे।

Source page 63

जग हो कुपूत पै कुमाता न हो राधे,

शिशु माँ को जाने नहिं माँ ही जना दे।

तेरे तो हैं सब खरे खरे शिशु राधे,

खरों सँग खोटे को चला दे मेरी राधे।

मुझ से पतित यदि होते नहिं राधे,

तो किसे पावन करती बता दे।

माना मैं हूँ तेरा अति बुरा शिशु राधे,

तेरी कृपा बिनु भला हुआ कौन राधे।

तेरी दासी मारे नित तेरे शिशु राधे,

पास बैठी देखे तू है कैसी माता राधे।

हरि विमुखन सँग ना दे ना दे ना दे,

ब्रज रसिकन सँग नित्य दिला दे।

दुःख निवृत्ति नहिं माँगूँ मेरी राधे,

तेरे बिन एक पल कलप बना दे।

मेरे उर में तो नित रह मेरी राधे,

बाहर आके कभू झलक दिखा दे।

बिना पूछे मेरे उर गृह रह राधे,

दे दे किराया टुक झलक दिखा दे।

Source page 64

मैं हूँ मायाधीन तू है मायाधीश राधे,

माया को हटा दे मायातीत बना दे।

सब को लगी है माया डायिनी राधे,

नाम गाके ताली बजाके भगा दे।

ब्रज रस की इक बूँद पिला दे,

कहा घटि जाये तोरा प्रेम सुधा दे।

मन मनमानी करे माने नहिं राधे,

याको इक ब्रज रस बूँद पिला दे।

ब्रजरस की राधे शीशी बना दे,

वामें गौर श्याम रस भरि के पिला दे।

मैं हूँ मायाबद्ध पै न चाहूँ मुक्ति राधे,

मोको गोपी प्रेम बद्ध सदा को बना दे।

माँगे भीख दर दर तेरा शिशु राधे,

सीने से लगा ले कहा घटि जाये राधे।

सात स्वर्ग ना दे पाँच अपवर्ग ना दे,

एक बार ब्रजरस छकि के पिला दे।

तीनों ना दे मोहिं पाँचों ना दे,

इसके भी आगे जो है सोई दिला दे।

Source page 65

गोविन्दहुँ भज राधे राधे,

गोविन्द गोविन्द भजे श्री राधे।

कोऊ भजे गोविन्द कोऊ राधे,

दोनों बड़े भोले भजो गोविन्द राधे।

गोविन्द गोविन्द भजो कहें राधे,

गोविन्द भी कहें भजो राधे राधे।

राधे बिनु गोविन्द जानिये आधे,

गोविन्द बिनु जानो आधी राधे।

तुम तो भजो मन छिन छिन राधे,

भाजे अइहै गोविन्द सुनि नाम राधे।

नाम विख्यात “कृपालु” मम राधे,

तू नाम को साँच साँचु करु राधे॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३032
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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