कीर्तन 1–50
कीर्तन 28 · Kirtan 28
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
माँगे गोपियों सा प्रेम दे चाहे ना दे।
कालि भजु कालि भजु जनि करु आगे,
तू तो रही सदा ते ही कृपामयी राधे,
अब तो मैं तेरा पाछा छोडूँ नहिं राधे,
कान खोल सुनु मैं हठीला शिशु राधे।
Source page 63
जग हो कुपूत पै कुमाता न हो राधे,
शिशु माँ को जाने नहिं माँ ही जना दे।
तेरे तो हैं सब खरे खरे शिशु राधे,
खरों सँग खोटे को चला दे मेरी राधे।
मुझ से पतित यदि होते नहिं राधे,
माना मैं हूँ तेरा अति बुरा शिशु राधे,
तेरी कृपा बिनु भला हुआ कौन राधे।
तेरी दासी मारे नित तेरे शिशु राधे,
पास बैठी देखे तू है कैसी माता राधे।
हरि विमुखन सँग ना दे ना दे ना दे,
दुःख निवृत्ति नहिं माँगूँ मेरी राधे,
मेरे उर में तो नित रह मेरी राधे,
Source page 64
मैं हूँ मायाधीन तू है मायाधीश राधे,
माया को हटा दे मायातीत बना दे।
सब को लगी है माया डायिनी राधे,
कहा घटि जाये तोरा प्रेम सुधा दे।
वामें गौर श्याम रस भरि के पिला दे।
मैं हूँ मायाबद्ध पै न चाहूँ मुक्ति राधे,
मोको गोपी प्रेम बद्ध सदा को बना दे।
माँगे भीख दर दर तेरा शिशु राधे,
सीने से लगा ले कहा घटि जाये राधे।
सात स्वर्ग ना दे पाँच अपवर्ग ना दे,
Source page 65
गोविन्द गोविन्द भजे श्री राधे।
दोनों बड़े भोले भजो गोविन्द राधे।
गोविन्द गोविन्द भजो कहें राधे,
गोविन्द भी कहें भजो राधे राधे।
