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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 27 · 31/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 27 · Kirtan 27

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

83 source linesपुस्तक पृष्ठ 57–62PDF 68–73

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,

(प्यारी प्यारी भोरी भारी )

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

गुरु से ही तत्वज्ञान गोविन्द राधे,

पुनि पुनि सुनि मन बुधि में बिठा दे।

तू तो माँगे शुद्ध मन गोविन्द राधे,

गुरु ही अशुद्ध मन शुद्ध करा दे।

तू तो है बनो का साथी गोविन्द राधे,

गुरु तो सदा सदा की बिगरी बना दे।

Source page 58

गुरु तो है माता सम गोविन्द राधे,

सुत को सजाके हरि गोद बिठा दे।

गुरु को बिठा दे उर गोविन्द राधे,

श्यामाश्याम अइहैं आपु गलबहियाँ दे।

हरि के अधीन जग गोविन्द राधे,

गुरु के अधीन हरि हरि ही बता दे।

हरि कृपा गुरु मिले गोविन्द राधे,

गुरु कृपा हरि मिले तत्त्व बता दे।

हरि चह गुरु सुख गोविन्द राधे,

गुरु चह हरि सुख तत्त्व बता दे।

हरि गुरु तनु दो है गोविन्द राधे,

पै भीतर दोउ एक बता दे।

गुरु सेवा हरि सेवा गोविन्द राधे,

दोनों ही हैं एक अस रसिक बता दे।

तुम भी मोहिं भूलो नहिं गोविन्द राधे,

मैं भी तोहिं भूलूँ नहिं ऐसी बना दे।

स्वामी सखा सुत पति गोविन्द राधे,

चार चार नाते तोसों कोई तो निभा दे।

Source page 59

भुक्ति मुक्ति डाकिनि गोविन्द राधे,

इनसे बचे जो सोई प्रेमी बता दे।

तेरे मेरे मिलन में गोविन्द राधे,

बाधा तेरी माया वाय सदा को भगा दे।

तू ही मेरा मैं भी तेरा गोविन्द राधे,

बीच में है माया वाय मारि भगा दे।

मैं भी तेरा मेरा तेरा गोविन्द राधे,

जनम जनम का भिखारी तोहिं का दे।

सुख के भिखारी सब गोविन्द राधे,

तू ही इक सुखदाता दे चाहे ना दे।

अभी भजु अभी भजु गोविन्द राधे,

जाने कब काल तेरा टिकट कटा दे।

पिछला बिगारा मैंने गोविन्द राधे,

अगला अकारण कृपा ते बना दे।

शरण शरण तेरी गोविन्द राधे,

प्यार करे चाहे पग ठुकरा दे।

दर्शन दे या ना दे गोविन्द राधे,

दर्शन हित नित रोना सिखा दे।

Source page 60

तेरा पर्दा योग माया गोविन्द राधे,

मेरा पर्दा माया दोनों पर्दा उठा दे।

तू तो बिनु कारण गोविन्द राधे,

भक्ति आदि साधना का नियम हटा दे।

तेरा तन भी है काला गोविन्द राधे,

मेरा मन भी है काला जोरी बना दे।

तू भी बड़ा चंचल गोविन्द राधे,

मेरा मन चंचल दोनों को लड़ा दे।

लेना काम देना प्रेम गोविन्द राधे,

लेना देना दोनों व्यापार बता दे,

रिद्धि सिद्धि निद्धि ना दे गोविन्द राधे,

गोपीजन जैसा गोपी प्रेम दिला दे।

तीनों तजु सातों तजु गोविन्द राधे,

ग्यारहवे में ग्यारहवों लगा दे।

हरि मिट्टी जग घट गोविन्द राधे,

जग घट की है आदि अंत बता दे।

निराकार ब्रह्म मिट्टी गोविन्द राधे,

साकार ब्रह्म कृष्ण हीरा बता दे।

Source page 61

हरि भजें भक्तन गोविन्द राधे,

भक्त भजें हरि विधि बुधि भरमा दे।

कुसुम सरोवर गोविन्द राधे,

श्यामा श्याम लीला धाम रसिक बता दे।

कर्मी योगी ज्ञानी गोविन्द राधे,

कृष्ण प्रेमी ही है निष्काम बता दे।

ज्ञानी कहे सोऽहं सोऽहं गोविन्द राधे,

भक्त कहे ना ना पाछे “दा” भी लगा दे।

कृष्ण भक्ति युक्त हो तो गोविन्द राधे,

श्वपच भी बोले जो तो शीश झुका दे।

कृष्ण भक्ति युक्त हो तो गोविन्द राधे,

शिशु भी बोले जो तो शीश झुका दे।

कृष्ण भक्ति हीन हो तो गोविन्द राधे,

ब्रह्मा भी बोले जो तो मुँह बिचका दे।

कृष्ण भक्ति हीन हो तो गोविन्द राधे,

जो भी कोई बोले वाय डाँटि भगा दे।

सोई पढ़ो सोई सुनो गोविन्द राधे,

जो तेरा कृष्ण प्रेम और बढ़ा दे।

Source page 62

राधे बिनु श्याम आधे श्याम बिनु राधे,

चाहे कहु श्याम या “कृपालु” कहु राधे॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३031
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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