कीर्तन 1–50
कीर्तन 27 · Kirtan 27
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
गुरु से ही तत्वज्ञान गोविन्द राधे,
पुनि पुनि सुनि मन बुधि में बिठा दे।
तू तो माँगे शुद्ध मन गोविन्द राधे,
गुरु ही अशुद्ध मन शुद्ध करा दे।
Source page 58
गुरु तो है माता सम गोविन्द राधे,
गुरु को बिठा दे उर गोविन्द राधे,
श्यामाश्याम अइहैं आपु गलबहियाँ दे।
गुरु के अधीन हरि हरि ही बता दे।
हरि कृपा गुरु मिले गोविन्द राधे,
गुरु कृपा हरि मिले तत्त्व बता दे।
गुरु चह हरि सुख तत्त्व बता दे।
हरि गुरु तनु दो है गोविन्द राधे,
गुरु सेवा हरि सेवा गोविन्द राधे,
दोनों ही हैं एक अस रसिक बता दे।
तुम भी मोहिं भूलो नहिं गोविन्द राधे,
मैं भी तोहिं भूलूँ नहिं ऐसी बना दे।
Source page 59
भुक्ति मुक्ति डाकिनि गोविन्द राधे,
इनसे बचे जो सोई प्रेमी बता दे।
तेरे मेरे मिलन में गोविन्द राधे,
बाधा तेरी माया वाय सदा को भगा दे।
तू ही मेरा मैं भी तेरा गोविन्द राधे,
बीच में है माया वाय मारि भगा दे।
मैं भी तेरा मेरा तेरा गोविन्द राधे,
जनम जनम का भिखारी तोहिं का दे।
सुख के भिखारी सब गोविन्द राधे,
तू ही इक सुखदाता दे चाहे ना दे।
पिछला बिगारा मैंने गोविन्द राधे,
Source page 60
तेरा पर्दा योग माया गोविन्द राधे,
मेरा पर्दा माया दोनों पर्दा उठा दे।
भक्ति आदि साधना का नियम हटा दे।
तेरा तन भी है काला गोविन्द राधे,
मेरा मन भी है काला जोरी बना दे।
मेरा मन चंचल दोनों को लड़ा दे।
लेना काम देना प्रेम गोविन्द राधे,
लेना देना दोनों व्यापार बता दे,
रिद्धि सिद्धि निद्धि ना दे गोविन्द राधे,
गोपीजन जैसा गोपी प्रेम दिला दे।
तीनों तजु सातों तजु गोविन्द राधे,
ग्यारहवे में ग्यारहवों लगा दे।
हरि मिट्टी जग घट गोविन्द राधे,
Source page 61
भक्त भजें हरि विधि बुधि भरमा दे।
श्यामा श्याम लीला धाम रसिक बता दे।
कर्मी योगी ज्ञानी गोविन्द राधे,
कृष्ण प्रेमी ही है निष्काम बता दे।
ज्ञानी कहे सोऽहं सोऽहं गोविन्द राधे,
भक्त कहे ना ना पाछे “दा” भी लगा दे।
कृष्ण भक्ति युक्त हो तो गोविन्द राधे,
श्वपच भी बोले जो तो शीश झुका दे।
कृष्ण भक्ति युक्त हो तो गोविन्द राधे,
शिशु भी बोले जो तो शीश झुका दे।
कृष्ण भक्ति हीन हो तो गोविन्द राधे,
ब्रह्मा भी बोले जो तो मुँह बिचका दे।
कृष्ण भक्ति हीन हो तो गोविन्द राधे,
जो भी कोई बोले वाय डाँटि भगा दे।
Source page 62
