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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 56 · 60/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 56 · Kirtan 56

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 110–111PDF 121–122

राधे राधे राधे प्रेम अगाधे।

(नीको लागे . . .)

राधे राधे राधे प्रेम अगाधे।

तू ही तो हमारी बरसाने वारी राधे।

तू ही मेरी रस बरसाने वारी राधे।

आजा उर ऊँचे महल वारी राधे।

आजा उर प्यारी प्यारी भोरी भारी राधे।

कृपा करु कृपा करु कृपा करु राधे।

तू तो बिनु कारण कृपा करे राधे।

तेरी ही कृपा का है भरोसा भारी राधे।

भला हूँ बुरा हूँ जो हूँ तेरा ही हूँ राधे।

ब्रह्म श्याम भी न पायो तेरा पार राधे।

तेरी महिमा को तू भी जाने नहिं राधे।

तेरी कृपा ते ही कोई जाने माने राधे।

जग माँ भी शिशु को जनावे मैं माँ राधे।

तेरे बिनु मेरा जीना जीना नहिं राधे।

Source page 111

तेरे सिवा कहाँ जाऊँ कौन सुने राधे।

पतितन की तो इक तू ही सुने राधे।

तू ही तो “कृपालु” गति मति रति राधे।

तेरी दासी दासी बनुँ यह साध राधे।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३060
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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