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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 84 · 88/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 84 · Kirtan 84

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 141PDF 152

श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी।

(गोविन्द जय जय गोपाल जय जय।)

श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी।

प्यारी पर प्रियतम बलिहारी, पिय पर प्यारी वारी वारी।

जय जय महलन वारी प्यारी, जय जय वृंदाविपिन बिहारी।

प्रियतम प्राणाधिक सुकुमारी, प्यारी प्राणाधिक बनवारी।

प्यारी बनि गईं कुंज बिहारी, कुंज बिहारी बनि गये प्यारी।

प्यारी ते प्यारे बनवारी, बनवारी ते प्यारी प्यारी।

मादन रस वारी नथवारी, मदन विमोहन रास बिहारी।

जय जय श्री वृषभानुदुलारी, जय जय यशुमति अजिर बिहारी।

राधा अवराधत बनवारी, बनवारी अवराधत प्यारी।

प्यारी कह सब भज बनवारी, बनवारी कह सब भज प्यारी।

दोउ इक कह “कृपालु” श्रुति चारी, याते दोउ सँग भजु पिय प्यारी।

यद्यपि हैं “कृपालु” बनवारी, पै नहले पे दहला प्यारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३088
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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