कीर्तन 51–100
कीर्तन 84 · Kirtan 84
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी।
श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी।
प्यारी पर प्रियतम बलिहारी, पिय पर प्यारी वारी वारी।
जय जय महलन वारी प्यारी, जय जय वृंदाविपिन बिहारी।
प्रियतम प्राणाधिक सुकुमारी, प्यारी प्राणाधिक बनवारी।
प्यारी बनि गईं कुंज बिहारी, कुंज बिहारी बनि गये प्यारी।
प्यारी ते प्यारे बनवारी, बनवारी ते प्यारी प्यारी।
मादन रस वारी नथवारी, मदन विमोहन रास बिहारी।
जय जय श्री वृषभानुदुलारी, जय जय यशुमति अजिर बिहारी।
राधा अवराधत बनवारी, बनवारी अवराधत प्यारी।
प्यारी कह सब भज बनवारी, बनवारी कह सब भज प्यारी।
दोउ इक कह “कृपालु” श्रुति चारी, याते दोउ सँग भजु पिय प्यारी।
