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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 64 · 68/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 64 · Kirtan 64

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

35 source linesपुस्तक पृष्ठ 118–119PDF 129–130

जय जय राधारानी राधारानी राधारानी।

(मतवारी प्यारी . . .)

जय जय राधारानी राधारानी राधारानी।

जय जय वृन्दावन महरानी राधारानी।

जय जय सँग ब्रजभामिनि राधारानी।

जय जय विहरति वृन्दावन राधारानी।

जय जय ब्रजबनितनि धन राधारानी।

जय जय ब्रजवासिन धन राधारानी।

जय जय चुवे ब्रजरस तन राधारानी।

जय जय अवढरदानी राधारानी।

जय जय ब्रजरस खानी राधारानी।

जय जय प्रेम सुखदानी राधारानी।

जय जय आनन्दघन तन राधारानी।

जय जय दुतिदामिनि तन राधारानी।

जय जय चिन्मय ब्रजरानी राधारानी।

जय जय ब्रह्म रूप धन राधारानी।

जय जय प्राण प्राणधन राधारानी।

जय जय जीवन जीवन राधारानी।

Source page 119

जय जय निर्धन को धन राधारानी।

जय जय दीन जनन धन राधारानी।

जय जय पतित जनन धन राधारानी।

जय जय अग जग जननी राधारानी।

जय जय ठाकुर ठकुरानी राधारानी।

जय जय श्यामहुँ स्वामिनि राधारानी।

जय जय मादन स्वामिनि राधारानी।

जय जय प्रेमहुँ स्वामिनि राधारानी।

जय जय रूपहुँ स्वामिनि राधारानी।

जय जय गति गजगामिनि राधारानी।

जय जय छवि अभिरामिनि राधारानी।

जय जय छवि छवि मोहिनि राधारानी।

जय जय रति मन मोहिनि राधारानी।

जय जय निज जन मोहिनि राधारानी।

जय जय मोहन मोहिनि राधारानी।

जय जय निज मन मोहिनि राधारानी।

जय जय त्रिभुवन मोहिनि राधारानी।

जय “कृपालुहुँ” मोहिनि राधारानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३068
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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