लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 3 · 7/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 3 · Kirtan 3

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

9 source linesपुस्तक पृष्ठ 4PDF 15

जयति गुरु वर जयति गिरिधर, दोउ प्रानन प्यारे।

(जयति गुरु वर . . .)

जयति गुरु वर जयति गिरिधर, दोउ प्रानन प्यारे।

जयति गुरु वर जयति गिरिधर, दोउ प्रानन प्यारे।

मेरे गुरु वर मेरे गिरिधर, मेरे प्रानन प्यारे।

मेरे गुरु वर मेरे गिरिधर, मेरे प्रानन प्यारे।

शरण गुरु वर शरण गिरिधर, करहु करु णा प्यारे।

शरण गुरु वर शरण गिरिधर, करहु करु णा प्यारे।

जोइ गुरु वर सोइ गिरिधर, दोउ एकहिं प्यारे।

जोइ गुरु वर सोइ गिरिधर, दोउ एकहिं प्यारे।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३007
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text