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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 22 · 26/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 22 · Kirtan 22

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 49–50PDF 60–61

जयति जयति जय भानुदुलारी।

(प्यारी प्यारी भोरी भारी .......)

जयति जयति जय भानुदुलारी।

जो भी तोपै वारी वापै जाऊँ बलिहारी।

तेरी दासी दासी दासी दासी बनूँ प्यारी।

Source page 50

तेरे सुख में ही निज सुख मानूँ प्यारी।

तेरी इच्छा में ही इच्छा राखूँ नित प्यारी।

जब जंभुवावो चुटकी बजाऊँ प्यारी।

प्यारी को हँसाऊँ जब जब रूठे प्यारी।

पिया से मिलाऊँ जब जब कहें प्यारी।

पिया को न आने दऊँ जब कहें, प्यारी।

हौले हौले पग चापूँ जब सोयें प्यारी।

रास रस देंगी कभू कृपा करि प्यारी।

मैं भी तेरी हूँ “कृपालु” कीर्तिकुमारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३026
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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