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जयति जयति जय भानुदुलारी।
(प्यारी प्यारी भोरी भारी .......)
जयति जयति जय भानुदुलारी।
जो भी तोपै वारी वापै जाऊँ बलिहारी।
तेरी दासी दासी दासी दासी बनूँ प्यारी।
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तेरे सुख में ही निज सुख मानूँ प्यारी।
तेरी इच्छा में ही इच्छा राखूँ नित प्यारी।
जब जंभुवावो चुटकी बजाऊँ प्यारी।
प्यारी को हँसाऊँ जब जब रूठे प्यारी।
पिया से मिलाऊँ जब जब कहें प्यारी।
पिया को न आने दऊँ जब कहें, प्यारी।
हौले हौले पग चापूँ जब सोयें प्यारी।
रास रस देंगी कभू कृपा करि प्यारी।
मैं भी तेरी हूँ “कृपालु” कीर्तिकुमारी॥
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