Skip to main content

श्यामा मेरी ठकुरानी श्याम मेरे ठाकुर।
(श्यामा मेरी ठकुरानी...)
श्यामा मेरी ठकुरानी श्याम मेरे ठाकुर।
श्यामा श्याम श्यामा श्याम जन को बसा उर।
श्याम भाजे अइहैं तू तो श्यामा को बसा उर।
श्यामा अइहैं तब अइहैं ललिता विशाखा उर।
भुक्ति मुक्ति डाकिनी इनको न ला उर।
हरि गुरु भक्ति भाव निष्काम ला उर।
रो के पुकारो नित श्यामा श्याम आ उर।
Source page 186
निज सुख चाहे जो भी वाको मानो बाउर।
लक्ष्य एक ही हो नित हरि गुरु सेवा उर।
रहत “कृपालु” दोऊ कृपा हित आतुर॥
❦
Source, meanings & reading links