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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 63 · 67/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 63 · Kirtan 63

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

31 source linesपुस्तक पृष्ठ 116–117PDF 127–128

मेरी राधारानी राधारानी राधारानी।

(मतवारी प्यारी . . .)

मेरी राधारानी राधारानी राधारानी।

मेरी ठकुरानी महरानी राधारानी।

जाकी कोटि कमला भवानी नौकरानी।

जाके पाछे डोले ब्रह्म सारंगपानी।

जेहि डर डरे थर थर चक्रपानी।

विहरति नित वृन्दावन रजधानी।

ठाकुरहुँ की ठकुरानी राधारानी।

महरानीहूँ की महरानी राधारानी।

जाकी वृंदावन रजधानी राधारानी।

अब तो हमारी सुधि लेहु राधारानी।

Source page 117

तेरी माया ने भुलाया मोहिं राधारानी।

तूने काहे को भुलाया मोहिं राधारानी।

तेरी कृपा ते ही बने तेरा राधारानी।

तेरा पाछा नहीं छोड़ूँ अब राधारानी।

जग हो कुपूत कुमाता न राधारानी।

मैं बुरा हूँ किन्तु तेरा ही हूँ राधारानी।

तेरे बिनु जीना जीना नहिं राधारानी।

आजा चोरी चोरी चुपके ते राधारानी।

इक बार तू है मेरा कहु राधारानी।

इक बार दिखा दे छवि राधारानी।

इक बार लगा ले उर राधारानी।

मैं तो तेरा था हूँ रहूँगा भी राधारानी।

अपनाओगी भरोसा यह राधारानी।

इक दिन आना होगा तोहिं राधारानी।

उर में है आजा बाहर राधारानी।

ना दरस दे तो रोना दे दे राधारानी।

तेरी रु चि महँ रु चि राखूँ राधारानी।

तेरी दासी दासी दासी बनुँ राधारानी।

जित देखूँ तित तू ही दीखे राधारानी।

तू तो सदा ते “कृपालु” अति राधारानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३067
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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