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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 19 · 23/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 19 · Kirtan 19

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

35 source linesपुस्तक पृष्ठ 46–47PDF 57–58

मेरी ठकुरानी महरानी राधारानी,

(प्यारी प्यारी भोरी भारी . . .)

मेरी ठकुरानी महरानी राधारानी,

ठाकुरहूँ की ठकुरानी राधारानी।

महरानिहुँ महरानी राधारानी,

जाकर चाकर सारँगपानी।

मैं हूँ राधेरानी जू की मेरी राधेरानी,

गुरु ने जनाई जानी मेरी राधेरानी।

मैं तेरी थी तेरी ही रहूँगी राधेरानी,

तू माने न माने तू ही मेरी राधेरानी।

भली हूँ बुरी हूँ हूँ तो तेरी राधेरानी,

तेरी बनूँ या ना मेरी बनू राधेरानी।

मैं तो तेरी हूँ ही मेरी बनू राधेरानी,

तेरी हो के भी न बनी तेरी राधेरानी।

उर में तो है बाहर आजा राधेरानी,

तू ही मेरी बुधि में बिठा दे राधारानी।

मेरी राधारानी प्रेम रूप रस खानी,

विहरति नित वृंदावन रजधानी।

Source page 47

मेरी ठकुरानी महरानी राधेरानी,

चरण पलोटें जाको सारंगपानी।

मेरी ठकुरानी जैसी मेरी ठकुरानी,

चारों मुक्ति राधारानी घर भरें पानी।

जय हो, जय हो, जय हो, जय हो, जय हो राधारानी,

करें चक्रपानी राधारानी अगवानी।

लखें राधारानी भौंह सारँग पानी,

राधारानी अँगुलि पै नाचें चक्रपानी।

महरानी राधारानी ब्रजरसखानी,

जय हो जय हो जय हो वृन्दावन ठकुरानी।

सोरहो सिंगार करें जब राधेरानी,

माथे काला टीका देयँ सारँगपानी।

राधेरानी ठाकुरहूँ की ठकुरानी,

सब मिलि बोलो जय हो जय हो राधे रानी।

जब जब निकसे सवारी राधेरानी,

पाछे चलि बोले ब्रह्म जय राधेरानी।

ऐसी हैं “कृपालु” राधारानी रसखानी,

जासों माँगे ब्रजरस सारँगपानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३023
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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