कीर्तन 1–50
कीर्तन 19 · Kirtan 19
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी ठकुरानी महरानी राधारानी,
(प्यारी प्यारी भोरी भारी . . .)
मैं हूँ राधेरानी जू की मेरी राधेरानी,
गुरु ने जनाई जानी मेरी राधेरानी।
मैं तेरी थी तेरी ही रहूँगी राधेरानी,
तू माने न माने तू ही मेरी राधेरानी।
भली हूँ बुरी हूँ हूँ तो तेरी राधेरानी,
तेरी बनूँ या ना मेरी बनू राधेरानी।
मैं तो तेरी हूँ ही मेरी बनू राधेरानी,
तेरी हो के भी न बनी तेरी राधेरानी।
उर में तो है बाहर आजा राधेरानी,
तू ही मेरी बुधि में बिठा दे राधारानी।
Source page 47
मेरी ठकुरानी जैसी मेरी ठकुरानी,
चारों मुक्ति राधारानी घर भरें पानी।
जय हो, जय हो, जय हो, जय हो, जय हो राधारानी,
करें चक्रपानी राधारानी अगवानी।
लखें राधारानी भौंह सारँग पानी,
राधारानी अँगुलि पै नाचें चक्रपानी।
जय हो जय हो जय हो वृन्दावन ठकुरानी।
सोरहो सिंगार करें जब राधेरानी,
माथे काला टीका देयँ सारँगपानी।
सब मिलि बोलो जय हो जय हो राधे रानी।
पाछे चलि बोले ब्रह्म जय राधेरानी।
