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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 118 · 122/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 118 · Kirtan 118

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

16 source linesपुस्तक पृष्ठ 184–185PDF 195–196

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

(हरि हरि बोल)

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

तुम भी मोहि भूलो नहिं पल छिन राधे,

मैं भी तोहि भूलूँ नहिं ऐसी बना दे।

भुक्ति ना दे मुक्ति ना दे बैकुण्ठ ना दे,

काऊ गोपी ते गोपी प्रेम दिला दे।

तू ही एक पतित पावनि राधे,

Source page 185

तोहिं तजि जाऊँ कित तू ही बता दे।

अब तो मैं तेरा पाछा छोड़ू नहीं राधे,

चाहे अपनाये चाहे चक्र चला दे।

सारा जग कहत कृपालु मोहिं राधे,

कृपा करि साँचो “कृपालु” बना दे॥

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी।

चलु बरसाने तहँ परखत प्यारी।

चलु बरसाने तहँ मिलेंगे बिहारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३122
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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