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राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
(हरि हरि बोल)
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
तुम भी मोहि भूलो नहिं पल छिन राधे,
मैं भी तोहि भूलूँ नहिं ऐसी बना दे।
भुक्ति ना दे मुक्ति ना दे बैकुण्ठ ना दे,
काऊ गोपी ते गोपी प्रेम दिला दे।
तू ही एक पतित पावनि राधे,
Source page 185
तोहिं तजि जाऊँ कित तू ही बता दे।
अब तो मैं तेरा पाछा छोड़ू नहीं राधे,
चाहे अपनाये चाहे चक्र चला दे।
सारा जग कहत कृपालु मोहिं राधे,
कृपा करि साँचो “कृपालु” बना दे॥
प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी।
रस बरसाने वारी बरसाने वारी।
चलु बरसाने तहँ परखत प्यारी।
चलु बरसाने तहँ मिलेंगे बिहारी।
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