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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 83 · 87/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 83 · Kirtan 83

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

27 source linesपुस्तक पृष्ठ 139–140PDF 150–151

श्री राधे बरसाने वारी,

(गोविन्द जय जय . . .)

श्री राधे बरसाने वारी,

शरण शरण राधे शरण तिहारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

ब्रज रस की बरसाने वारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

शरणागत अपनाने वारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

पतितन हृदय लगाने वारी।

Source page 140

श्री राधे बरसाने वारी,

अस सरकार न भोरी भारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

जाको चाकर कृष्ण मुरारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

जाको नाम जपत बनवारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

जेहि पग धर हरि मुकुट उतारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

जाकी कर जयकार मुरारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

जाकी पद रज हरि सिर धारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

जाके पद पर गिर गिरिधारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

जाको लखि हरि सुरति बिसारी।

श्री राधे बरसाने वारी,

जापै हौं “कृपालु” बलिहारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३087
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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