कीर्तन 1–50
कीर्तन 29 · Kirtan 29
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
रस बरसाने वारी बरसाने वारी,
Source page 66
ये ही बरसाने महँ वेद दें बुहारी,
ये ही बरसाने रज महँ लोटीं प्यारी।
तू ही मेरी थी भी है भी रहेगी भी प्यारी,
तोको तजि जाऊँ कित नाम बता प्यारी।
मैं हूँ तेरा अति ही हठीला शिशु प्यारी,
तेरा पाछा छोडूँ नहिं जुग जुग प्यारी।
यामें तो है दोषी तेरी माया सुकुमारी।
माना मैं पतित अति हूँ तो तेरा प्यारी,
कान खोल सुनु पाछा छोडूँ नहिं प्यारी।
Source page 67
मोको तो भुलाया तेरी माया ने ही प्यारी,
तूने क्यों भुलाया मोहिं तू ही महतारी।
हम सब पतित ना माँगे क छु प्यारी,
बस पल को भी नहिं भूलूँ तोहिं प्यारी।
शिशु तो न जाने कौन माँ है मेरी प्यारी,
माँ ही तो बतावे मैं हूँ तेरी महतारी।
मैं भी तेरा शिशु तू ही मेरी महतारी,
टुक ब्रज रस को पिला दे मोहिं प्यारी।
सातों स्वर्ग पाँचों अपवर्ग ना दे प्यारी,
मेरी ओर लखि टुक मुस्कुरा दे प्यारी।
माना मैं बुरी हूँ किन्तु हूँ तो तेरी प्यारी,
तेरी कृपा बिनु कौन अच्छा बना प्यारी।
तुम भी मोहिं भूलो नहिं भानुदुलारी,
ऐसी कृपा करु मैं भी भूलूँ नहिं प्यारी।
तेरे बिनु जीना भी क्या जीना मम प्यारी,
दर्शन दे या ना दे रोना दे दे प्यारी।
Source page 68
आजा चोरी चोरी मेरी भानुदुलारी,
उर में छुपालूँ कोऊ जाने नहिं प्यारी।
सारा जग दीखे मोहिं प्यारी प्यारी प्यारी।
जित देखूँ तित तू ही तू ही दीखे प्यारी,
तेरा नाम गाऊँ तेरा रूप ध्याऊँ प्यारी।
मोहू मेरे मन को भी भानुदुलारी।
ब्रजरस बेचे प्यारी भानुदुलारी,
बिनुहिं बुलाये भाजे अइहैं बनवारी।
प्यार करे या ठुकराये मोहिं प्यारी,
कान खोल सुन पाछा छोडूँ नहिं प्यारी।
प्रेम भिखारी हरि दाता मेरी प्यारी,
याने मोहे मदनहूँ वाय मोही प्यारी।
Source page 69
व्यापक हो के पूछें कहाँ गईं प्यारी,
ब्रह्म माँगे महल टहल दे दो प्यारी।
जैसे मोहिं बनवारी वैसे मोहिं प्यारी,
प्यारी बिनु पिय आधे पिय बिनु प्यारी।
पिय रूप आनंद प्रेम रूप प्यारी,
यद्यपि दोनों एक बीस लगें प्यारी।
गौर रस पिये पिय श्याम रस प्यारी,
श्याम गौर रस पिये धनि ब्रजनारी।
गौर रस पियें पिय श्याम रस प्यारी,
मेरी प्यारी जू की छवि एतिक प्यारी,
लखि प्यारी छवि गिरे भू पै बनवारी,
लखि सखि बोले जय हो जय हो जय हो प्यारी।
Source page 70
प्यारी को बुलावे आपु अइहैं बनवारी,
जब अइहैं पिय प्यारी अइहैं ब्रजनारी।
कहा कहूँ मेरी प्यारी केतिक प्यारी,
प्यारी हूँ निज छवि लखि वारी वारी।
प्यारी जू की प्यारी छवि एतिक प्यारी,
प्यारी जू की परछाईं लखें बनवारी।
मेरी प्यारी जू की छवि एतिक प्यारी,
लट्टू बने घूमें पाछे पाछे बनवारी।
जेहि मग चले मेरी प्यारी की सवारी,
पाछे चलि बोलें जय हो जय हो बनवारी।
सोरहो सिंगार करि बैठीं कुंज प्यारी,
Source page 71
ब्रह्म माँगे महल टहल दे दो प्यारी,
प्यारी कृपा ते “कृपालु” बने बनवारी।
