कीर्तन 101–125
कीर्तन 123 · Kirtan 123
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी।
प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी।
सुधि लो हमारी बरसाने वारी प्यारी॥
गोरी गोरी भोरी भोरी भानुकिशोरी।
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तू ही गति मोरी मति मोरी रति मोरी।
तोहिं तजि जाऊँ कित भानुकिशोरी।।
नित्य रतिरस बोरी नित्य किशोरी।
तू ही तो है मोरी लखु हमरिहुँ ओरी॥
तू ही मेरी मैं भी तेरी श्रुति कह तोरी।
ओरी मोरी भानुकिशोरी सुनु मोरी।
तेरे बिनु जीना भी क्या जीना है किशोरी॥
सुनु बरसाने वारी प्यारी महतारी।
तेरा शिशु भूखा रोये गोद ले ले प्यारी।।
राके माँगु दे “कृपालु” तव महतारी॥
जय जय भानुनंदिनी जय जय नँदनन्दन।
जय जय ब्रज गोपी जन जय जय श्री वृन्दावन। ।
Source page 191
श्यामा श्याम नाम रूप गोविन्द राधे।
राधे बिनु श्याम आधे गोविन्द राधे।
ऐसे ही श्याम बिनु राधे भी आधे।।
शिशु ज्यों पुकारों रो के गोविन्द राधे।
भाजे भाजे अइहैं दोनों गलबहियाँ दे।।
गलबाँहीं दै के दोनों झलक दिखा दे॥
राधे पावें श्याम रस श्याम रस राधे।
हम सब पावें दोनों रस श्याम राधे॥
चलो प्रेम मन्दिर मिले श्याम राधे।
उनते ही माँगो गोपी प्रेेम सुधा दे॥
गुरु कहे हरि भजो हरि कहे भज गुरु।
मेरे भाये दोनों भजो गुरुवर गिरिधर॥
