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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 95 · 99/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 95 · Kirtan 95

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

24 source linesपुस्तक पृष्ठ 153–155PDF 164–166

मेरी राधारानी राधारानी, मेरी राधारानी राधारानी।

(मम प्रियतम . . .)

मेरी राधारानी राधारानी, मेरी राधारानी राधारानी।

मेरी राधारानी राधारानी, मेरी राधारानी राधारानी।

मेरी स्वामिनि राधारानी, ठाकुरहुँ की ठकुरानी।

Source page 154

मेरी राधारानी ब्रजरानी, मेरी राधारानी वरदानी।

जय जय राधारानी महरानी, जय जय हरि कर अगवानी।

जय जय वृंदावन रजधानी, जय जय विहरति राधारानी।

मेरी सदा ते थीं राधारानी, मेरी अब भी हैं राधारानी।

मेरी रहेंगी भी राधारानी, मेरी स्वामिनी राधारानी।

गज गामिनि राधारानी, दुति दामिनि राधारानी।

अभिरामिनि राधारानी, मम स्वामिनि राधारानी।

मेरी जीवनि राधारानी, मेरी ठकुरानी राधारानी।

ब्रजरस खानी राधारानी, हैं “कृपालु” मम राधारानी।।

(मम प्रियतम . . .)

मेरी प्रानन प्यारी जू, बरसाने वारी जू।

नथ बेसर वारी जू, वृषभानुदुलारी जू।।

अति प्यारी प्यारी तू, अति भोरी भारी तू।

अतिशय सुकुमारी तू, अति प्रियतम प्यारी तू।।

मेरी तो गति है तू, मेरी तो मति है तू।

मेरी तो रति है तू, मेरी सब कुछ है तू।।

Source page 155

एक प्रेम भिखारी माँ, आया तव द्वारे माँ।

तू दे या ना दे माँ, छोडँ़ू नहिं पाछा माँ।।

नहिं भुक्ति चहत राधे, नहिं मुक्ति चहत राधे।

बैकुण्ठ न चह राधे, दे प्रेम सुधा राधे।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३099
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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