कीर्तन 51–100
कीर्तन 95 · Kirtan 95
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी राधारानी राधारानी, मेरी राधारानी राधारानी।
मेरी राधारानी राधारानी, मेरी राधारानी राधारानी।
Source page 154
मेरी राधारानी ब्रजरानी, मेरी राधारानी वरदानी।
जय जय राधारानी महरानी, जय जय हरि कर अगवानी।
जय जय वृंदावन रजधानी, जय जय विहरति राधारानी।
मेरी सदा ते थीं राधारानी, मेरी अब भी हैं राधारानी।
मेरी रहेंगी भी राधारानी, मेरी स्वामिनी राधारानी।
गज गामिनि राधारानी, दुति दामिनि राधारानी।
अभिरामिनि राधारानी, मम स्वामिनि राधारानी।
मेरी जीवनि राधारानी, मेरी ठकुरानी राधारानी।
ब्रजरस खानी राधारानी, हैं “कृपालु” मम राधारानी।।
मेरी प्रानन प्यारी जू, बरसाने वारी जू।
नथ बेसर वारी जू, वृषभानुदुलारी जू।।
अति प्यारी प्यारी तू, अति भोरी भारी तू।
अतिशय सुकुमारी तू, अति प्रियतम प्यारी तू।।
Source page 155
एक प्रेम भिखारी माँ, आया तव द्वारे माँ।
तू दे या ना दे माँ, छोडँ़ू नहिं पाछा माँ।।
