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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 8 · 12/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 8 · Kirtan 8

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 13PDF 24

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी,

(गुरुः कृपालुर्मम शरणम् . . .)

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी,

जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी।

आगे आगे प्यारी चले पाछे ब्रजनारी,

ब्रजनारी पाछे पाछे चले बनवारी।

जब जब निकसत प्यारी की सवारी,

भुजन उठाय बोले पिय जय हो प्यारी।

प्यारी को बुलाओ रो के भाजी आवें प्यारी,

बिनुहिं बुलाये भाजे आवें बनवारी।

ब्रजरस चुवे रोम रोम तनु प्यारी,

पियें ब्रजनारी ललचायें बनवारी।

कोउ जाने कैसे हैं कृपालु बनवारी,

पिय को “कुपालु” बनाने वारी प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३012
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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