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जयति जयति जय महरानी राधेरानी।
(श्याम हौं, कब ब्रज बसिहौं जाय . . .)
जयति जयति जय महरानी राधेरानी।
जयति जयति जय प्रेम रूप रसखानी।
जयति जयति जय वृंदावन ठकुरानी।
Source page 147
जयति जयति जग ठाकुर ठकुरानी।
जयति जयति जय दिव्य ब्रज महरानी।
जयति जयति महरानिहुँ की महरानी।
जयति जयति कहि पाछे चलें चक्रपानी।
जयति जयति बोलें कमला भवानी बानी।
जयति जयति जय ब्रजरस वरदानी।
जयति जयति कहि चारों मुक्ति भरें पानी।
जयति जयति कहि करें हरि अगवानी।
जयति “कृपालु” पर कृपा करु राधे रानी।।
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