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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 89 · 93/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 89 · Kirtan 89

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 146–147PDF 157–158

जयति जयति जय महरानी राधेरानी।

(श्याम हौं, कब ब्रज बसिहौं जाय . . .)

जयति जयति जय महरानी राधेरानी।

जयति जयति जय प्रेम रूप रसखानी।

जयति जयति जय वृंदावन ठकुरानी।

Source page 147

जयति जयति जग ठाकुर ठकुरानी।

जयति जयति जय दिव्य ब्रज महरानी।

जयति जयति महरानिहुँ की महरानी।

जयति जयति कहि पाछे चलें चक्रपानी।

जयति जयति बोलें कमला भवानी बानी।

जयति जयति जय ब्रजरस वरदानी।

जयति जयति कहि चारों मुक्ति भरें पानी।

जयति जयति कहि करें हरि अगवानी।

जयति “कृपालु” पर कृपा करु राधे रानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३093
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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