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मेरे ठाकुर गोविन्द ठकुरानी राधे।
(मतवारी प्यारी . . .)
मेरे ठाकुर गोविन्द ठकुरानी राधे।
उन बिनु मोहिं कल नहिं पल छिन आधे।
भुक्ति मुक्ति नहिं माँगूँ मोहिं प्रेम सुधा दे।
यह जनम जनम का भिखारी तोहिं का दे।
कहा घटि जाय तोरा टुक झलक दिखा दे।
नहिं छोड़ूँ पाछा तोरा चाहे चक्र चला दे।
रो रो माँगा करुँ प्रेम तू दे चाहे, चाहे ना दे।
कृपा करु या “कृपालु” निज नाम हटा दे।।
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