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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 18 · 22/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 18 · Kirtan 18

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

78 source linesपुस्तक पृष्ठ 41–45PDF 52–56

प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी,

सुधि लो हमारी वृषभानुदुलारी।

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी,

जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी।

तुम भी मोहिं भूलो नहीं भानुदुलारी,

मैं भी तोहिं भूलूँ नहीं भूलेहुँ प्यारी।

मेरी बेर काहे को निठुर भईं प्यारी,

तू तो करु णा की मूरति रहि प्यारी।

एक दिन सुनेगी भरोसा भारी प्यारी,

छोड़ूँ नहिं पाछा प्रेम दे या ना दे प्यारी।

Source page 42

तू तो मेरी थी है रहेगी भी सुकुमारी,

मैं भी तेरी बनूँ ऐसी कृपा करु प्यारी।

तेरी कृपा में तो कछु कमी नहिं प्यारी,

मैं ही कृपा पाने का हूँ नहिं अधिकारी।

तोको दीन जन प्रिय भानुदुलारी,

ऐसी कृपा करु दीन बनूँ सुकुमारी।

तुझ सी न दाता, नहिं मुझसा भिखारी,

भुक्ति मुक्ति माँगूँ नहिं प्रेम दे दे प्यारी।

तेरे बिनु अब जिया जाय नहिं प्यारी,

तेरा सुख बनि जाय मेरा सुख प्यारी।

तू ही मेरी मैं भी तेरी काहे माँ बिसारी,

या तो आजा या बुला ले पास निज प्यारी।

तेरे तो हैं सब खरे खरे सुत प्यारी,

खरों सँग खोटे को चला दे मेरी प्यारी।

माना मैं बुरी हूँ पै हूँ तेरी ही तो प्यारी,

तेरी कृपा बिना कौन अच्छी बनी प्यारी।

निज माया को भगा दे खरा बनूँ प्यारी,

माया ते तो हारे विधि हरि हर प्यारी।

Source page 43

मोहिं निज दासी दासी दासी करु प्यारी,

महल टहलिनि बना दे मोहिं प्यारी।

देऊँ बुहारी जेहि मग चलें प्यारी,

सेज सजाऊँ जहँ सोयें सुकुमारी।

व्यजन ढुलाऊँ जब सोयें सुकुमारी,

रास से पधारें जब चापूँ पग प्यारी।

हौले हौले लोरी गाऊँ जब सोयें प्यारी,

“श्याम श्याम” कान कहि के जगाऊँ प्यारी।

ऐसी बोली बोलूँ तजें मान हँसें प्यारी,

खाउँ बहु व्यंजन जूठन प्यारी।

पहिरूँ उतारन वसनन प्यारी,

सोरहो सिंगार करु ँ निज कर प्यारी।

काला टीका दऊँ गोरे गोरे माथे प्यारी,

पिय को चिढ़ाऊँ उर ते लगा के प्यारी।

प्यारी जैसी प्यारी तो हैं केवल प्यारी,

आत्मा की आत्मा की आत्मा हैं प्यारी।

प्यारी मोहे प्यारी लखि प्यारी अस प्यारी,

कामहुँ मोहे सोउ मोहे लखि प्यारी।

Source page 44

प्रेम रूप रसवारी नथवारी वारी,

तोपै बलिहारी बलिहारी बलिहारी।

मैं ही नहिं वारी वारी ब्रह्म बनवारी,

ऐसी प्यारी प्यारी पर को ना वारी वारी।

प्रानन प्यारी मेरी प्यारी मोहिं प्यारी,

उन प्यारी पर कोटि प्रानन वारी।

कैसे बताऊँ प्यारी केतिक प्यारी,

दृग रसना ना रसना ना दृगवारी।

कैसे बताऊँ प्यारी एतिक प्यारी,

प्यारी हूँ ना जाने मैं हूँ केतिक प्यारी।

मेरी प्यारी जू हैं एतिक भोरी भारी,

निज परछाईं कहँ मानें और नारी।

प्यारीजू की महिमा न जानें श्रुति चारी,

हरिहूँ न जाने अगनित तनु धारी।

चुवे ब्रजरस नित रोम रोम प्यारी,

पियें ब्रजनारी अरु कुंज बिहारी।

मेरी प्यारी प्यारी बरसाने वारी प्यारी,

जाके पाछे पाछे डोलें कुंज बिहारी।

Source page 45

आगे आगे प्यारी चलें पाछे ब्रजनारी,

वाके पाछे पिय चलें कहि “जय हो” प्यारी।

नित नई नई लागे प्यारी छवि प्यारी,

पुनि पुनि देखो और और लागे प्यारी।

नथवारी रँगीली महलवारी प्यारी,

मादन रसवारी अति सुकुमारी।

प्यारी पिय रस पियें, पिय रस प्यारी,

पिय प्यारी रस पियें सब ब्रजनारी।

ब्रह्म बनवारी लखि परछाईं प्यारी,

गिरें छिति मुरछित कहि हाय! प्यारी।

देयँ बुहारी पिय महलन प्यारी,

धरत मुकुट पिय चरनन प्यारी।

बनवारी चाकर स्वामिनि प्यारी,

बनते “कृपालु” ठाकुर बनवारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३022
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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