कीर्तन 101–125
कीर्तन 103 · Kirtan 103
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
रस बरसाने वारी बरसाने वारी प्यारी,
रस बरसाने वारी बरसाने वारी प्यारी,
तोपै वारी-वारी वृषभानुदुलारी प्यारी।
प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी प्यारी,
मैं तो तोपै वारी वारी बरसाने वारी प्यारी।
सोइ कुंज कुंज ढूँढ़े रोतो कित गई प्यारी।
जापै जग वारी, सोऊ तोपै वारी बनवारी,
तोको ढूँढ़ें कुंज कुंज कुंजबिहारी प्यारी।
तेरे रोम रोम बह दिव्य ब्रज रस प्यारी,
सोई रस पिय छकि रास बिहारी प्यारी।
कभू तो करोगी मोपै कृपा कृपामयी प्यारी,
Source page 168
राधेरानी राधेरानी राधेरानी राधेरानी।
मेरी राधेरानी महरानी हूँ की महरानी,
जाकी जय हो जय हो कहि ब्रह्म करे अगवानी।
प्रेम भिखारी हरि दाता मेरी राधारानी,
जग ठाकुरहूँ ने निज ठकुरानी मानी।
