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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 103 · 107/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 103 · Kirtan 103

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

22 source linesपुस्तक पृष्ठ 167–168PDF 178–179

रस बरसाने वारी बरसाने वारी प्यारी,

(हमारी, स्वामिनि राधेरानी।)

रस बरसाने वारी बरसाने वारी प्यारी,

तोपै वारी-वारी वृषभानुदुलारी प्यारी।

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी प्यारी,

मैं तो तोपै वारी वारी बरसाने वारी प्यारी।

जाको श्रुति कह आनंदघन बनवारी,

सोइ कुंज कुंज ढूँढ़े रोतो कित गई प्यारी।

जापै जग वारी, सोऊ तोपै वारी बनवारी,

तोको ढूँढ़ें कुंज कुंज कुंजबिहारी प्यारी।

तेरे रोम रोम बह दिव्य ब्रज रस प्यारी,

सोई रस पिय छकि रास बिहारी प्यारी।

कभू तो करोगी मोपै कृपा कृपामयी प्यारी,

यह है भरोसा भारी मम उर महँ प्यारी।

अगनित पतितन अपनायेहु प्यारी,

एक “कृपालुहिं” काहे बिसारी प्यारी।।

Source page 168

राधेरानी राधेरानी राधेरानी राधेरानी।

मेरी राधेरानी महरानी हूँ की महरानी,

जाकी जय हो जय हो कहि ब्रह्म करे अगवानी।

प्रेम भिखारी हरि दाता मेरी राधारानी,

जग ठाकुरहूँ ने निज ठकुरानी मानी।

महरानी राधेरानी वृन्दावन ठकुरानी,

जाको कह ठाकुर सोऊ करें अगवानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३107
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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