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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 59 · 63/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 59 · Kirtan 59

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

14 source linesपुस्तक पृष्ठ 113PDF 124

मेरी ठकुरानी महरानी राधे रानी।

(नीको लागे . . .)

मेरी ठकुरानी महरानी राधे रानी।

मेरी राधे रानी प्रेम रूप रस खानी।

मेरी राधे रानी ब्रजरानी रसखानी।

मैं तो ठकुरानी राधेरानी की दिवानी।

मेरी तो है इक स्वामिनी राधे रानी।

गावो राधे रानी ध्यावो रूप राधे रानी।

रो के जो बुलावे भाजी आवें राधे रानी।

जाकी नौकरानी कोटि कमला भवानी।

जाको गुन गिनि नहिं सक कोटि बानी।

मेरी ऐसी राधे रानी अवढर दानी।

जासों प्रेम भिक्षा माँगें सारँगपानी।

गुरु ने जनाया अब मैंने यह जानी।

हैं कृपालु पै “कृपालु” अति राधारानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३063
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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