कीर्तन 51–100
कीर्तन 59 · Kirtan 59
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी ठकुरानी महरानी राधे रानी।
मेरी ठकुरानी महरानी राधे रानी।
मेरी राधे रानी प्रेम रूप रस खानी।
मेरी राधे रानी ब्रजरानी रसखानी।
मैं तो ठकुरानी राधेरानी की दिवानी।
मेरी तो है इक स्वामिनी राधे रानी।
गावो राधे रानी ध्यावो रूप राधे रानी।
रो के जो बुलावे भाजी आवें राधे रानी।
जाको गुन गिनि नहिं सक कोटि बानी।
जासों प्रेम भिक्षा माँगें सारँगपानी।
