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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 23 · 27/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 23 · Kirtan 23

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

25 source linesपुस्तक पृष्ठ 50–51PDF 61–62

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

(प्यारी प्यारी भोरी भारी.....)

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

राधे राधे प्रेम अगाधे राधे।

राधे भुक्ति मुक्ति नौ दो ग्यारह करा दे।

राधे कर्म ज्ञान भक्ति तत्त्व बता दे।

राधे कर्म ज्ञान व्यर्थ क्यों हैं बता दे।

मेरा ले ले मैं भी ले ले गोविन्द राधे।

राधे कौन गोविन्द कौन समझा दे।

Source page 51

राधे राधे गोपी प्रेम सुधा दे।

गोपी जैसा निष्काम प्रेम सिखा दे।

राधे भक्ति रस का प्याला पिला दे।

राधे श्यामा श्याम रस घोल पिला दे।

राधे राधे दर्शन व्याकुलता दे।

राधे राधे तुम बिनु जीना ना दे।

राधे राधे सेवा प्यास बढ़ा दे।

राधे राधे रसिकन पग धूरि दिला दे।

राधे राधे टुक निज झलक दिखा दे।

राधे राधे ब्रज रस चसका लगा दे।

राधे राधे मन ब्रजरस में डुबा दे।

रँगीली महल वारी से मिला दे।

रँगीली महल की टहल दिला दे।

तेरे धाम आया कभु झलक दिखा दे।

आना नहिं चाहो तो जो आके बता दे।

भूलूँ नहिं तोहिं राधे, पल छिन आधे।

राधे राधे साँचु “कृपालु” बना दे॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३027
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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