कीर्तन 101–125
कीर्तन 121 · Kirtan 121
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी ठकुरानी महरानी राधारानी।
बोलो जय हो जय हो जय हो ब्रजरसखानी।
मेरी राधारानी प्रेम रूप रस खानी।
राधा कृपा के भिखारी सारँगपानी।
राधा महल बुहारी दें भवानी बानी।
राधा महल में चारों मुक्ति भरे पानी।
गुरु ने जनाई जानी मेरी राधारानी।
राधारानी की दिवानी कमला भवानी बानी।
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दे दे आँसू ले ले प्रेमधन राधारानी।
