कीर्तन 51–100
कीर्तन 100 · Kirtan 100
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जय श्री वृषभानुदुलार की, जय अलबेली सरकार की।
जय स्वामिनि नंदकुमार की, जय अधाधुंध दरबार की।
जय अति भोरी सुकुमार की, जय करु णा की भंडार की।
जय महाभाव साकार की, जय निराधार आधार की।
जय शक्ति ह्लादिनी सार की, जय मूरत रूप सिंगार की।
जय दीनन की रखवार की, जय पतितन की पतवार की।
जय प्रेम रूप रस सार की, जय छवि सोरह सिंगार की।
जय मम “कृपालु” सरकार की, जय सखियन प्राणाधार की।।
मेरी राधेरानी प्रेम रूप रसखानी।
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सब मिलि बोलो जय हो जय हो राधेरानी॥
तू ही मेरी थी मेरी है राधेरानी।
तेरा पाछा न छोड़ूँ मैं राधेरानी॥
आके ना जा ना जा मेरी राधेरानी॥
जाकी कोटि कमला, भवानी नौकरानी।।
राधे गोविन्दा गोविन्दा राधे गोविन्दा।
राधे गोविन्दा गोविन्दा राधे गोविन्दा।।
राधे गोविन्दा गोविन्दा राधे गोविन्दा।
राधे आनन्दकन्दा वृन्दावन चन्दा।।
राधे गोविन्दा गोविन्दा राधे गोविन्दा।
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भज पद द्वन्द्वा गुरु गोविन्दा।
भज पद द्वन्द्वा गुरु गोविन्दा।।
गुरु कह भजु भजु भजु गोविन्दा।।
राधे गोविन्दा गोविन्दा राधे गोविन्दा,
राधे आनन्द कन्दा वृन्दावन चन्दा।
प्यारी प्यारी भोरी भारी सुकुमारी प्यारी,
बोलो जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी।
कहा कहूँ मेरी प्यारी केतिक प्यारी,
जाके पाछे पाछे डोलें ब्रह्म बनवारी।
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