कीर्तन 1–50
कीर्तन 7 · Kirtan 7
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
(गुरुः कृपालुर्मम शरणम् . . .)
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
सात स्वर्ग ना दे, पाँच अपवर्ग ना दे,
प्रेम सुधा दे, अष्टयामी सेवा दे।
मेरा सब कुछ तेरा, मैं भी तेरा राधे,
तू ही बता सदा का भिखारी तोहिं का दे।
तेरी माया ने भुलाया भूला तोहिं राधे,
यामें मेरा दोष कहा तू ही बता दे।
मेरा मन मायिक तू है दिव्य राधे,
तेरा ध्यान कैसे करूँ तू ही बता दे।
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माना तेरे नाम में है तू ही बसी राधे,
पर यह बात मेरी बुधि में बिठा दे।
शिशुु मारे बार बार गर्भ पग राधे,
माँ ना अपराध माने दूध पिला दे।
स्वर्ग सुख ना दे अपवर्ग सुख ना दे,
तेरा सुख चाहूँ नित ऐसी बना दे।
देना है तो यह वर दे दे मेरी राधे,
तोसों कछु माँगूँ नहिं ऐसी बना दे।
भुक्ति मुक्ति ना दे मोहिं प्रेम सुधा दे,
पाछा नहीं छोड़ूँ चाहे चक्र चला दे।
