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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 7 · 11/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 7 · Kirtan 7

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

27 source linesपुस्तक पृष्ठ 11–12PDF 22–23

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,

(गुरुः कृपालुर्मम शरणम् . . .)

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,

अस वर दे ना भूलूँ पल छिन आधे।

सात स्वर्ग ना दे, पाँच अपवर्ग ना दे,

प्रेम सुधा दे, अष्टयामी सेवा दे।

मेरा सब कुछ तेरा, मैं भी तेरा राधे,

तू ही बता सदा का भिखारी तोहिं का दे।

तेरी माया ने भुलाया भूला तोहिं राधे,

यामें मेरा दोष कहा तू ही बता दे।

मेरा मन मायिक तू है दिव्य राधे,

तेरा ध्यान कैसे करूँ तू ही बता दे।

माया ते तो हारे विधि हरि हर राधे,

तू ही जब चाहे तब वाय भगा दे।

Source page 12

माना तेरे नाम में है तू ही बसी राधे,

पर यह बात मेरी बुधि में बिठा दे।

शिशुु मारे बार बार गर्भ पग राधे,

माँ ना अपराध माने दूध पिला दे।

स्वर्ग सुख ना दे अपवर्ग सुख ना दे,

तेरा सुख चाहूँ नित ऐसी बना दे।

देना है तो यह वर दे दे मेरी राधे,

तोसों कछु माँगूँ नहिं ऐसी बना दे।

तुम बिनु जियहूँ न पल छिन आधे,

ब्रजरस की इक बूँद पिला दे।

भुक्ति मुक्ति ना दे मोहिं प्रेम सुधा दे,

पाछा नहीं छोड़ूँ चाहे चक्र चला दे।

राधे बिनु पूर्ण ब्रह्म गोविन्द अाधे,

निज दासी दासी मो “कृपालु” को बना दे।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३011
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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