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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 44 · 48/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 44 · Kirtan 44

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

14 source linesपुस्तक पृष्ठ 97PDF 108

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

(कुंज कदंबनि डार)

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

राधे राधे तुम भी मोहिं भूलो नहिं राधे,

राधे राधे मैं भी नहिं भूलूँ पल आधे।

राधे राधे भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ ना दे,

राधे राधे निज जन की सेवा दे।

राधे राधे मेरा सब कुछ तेरा राधे,

राधे राधे सदा का भिखारी तोहिं का दे।

राधे राधे सातों स्वर्ग पाँचों मुक्ति ना दे,

राधे राधे ब्रजरस छकि के पिला दे।

राधे राधे छोडँ़ू नहिं पाछा तेरा राधे,

राधे राधे चाहे मोपै चक्र चला दे।

राधे राधे नाम ही का हूँ “कृपालु” राधे,

राधे राधे कृपा करि साँचु बना दे।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३048
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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