कीर्तन 1–50
कीर्तन 44 · Kirtan 44
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
राधे राधे तुम भी मोहिं भूलो नहिं राधे,
राधे राधे मैं भी नहिं भूलूँ पल आधे।
राधे राधे भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ ना दे,
राधे राधे मेरा सब कुछ तेरा राधे,
राधे राधे सदा का भिखारी तोहिं का दे।
राधे राधे सातों स्वर्ग पाँचों मुक्ति ना दे,
राधे राधे ब्रजरस छकि के पिला दे।
राधे राधे छोडँ़ू नहिं पाछा तेरा राधे,
राधे राधे चाहे मोपै चक्र चला दे।
