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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 66 · 70/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 66 · Kirtan 66

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

28 source linesपुस्तक पृष्ठ 120–122PDF 131–133

मेरी राधारानी प्रेमरूप रसखानी।

(मतवारी प्यारी . . .)

मेरी राधारानी प्रेमरूप रसखानी।

मेरी राधारानी तो हैं अवढरदानी।

जय हो जय हो जय हो राधारानी ठकुरानी।

Source page 121

राधारानी मेरी स्वामिनि अब जानी।

राधारानी ब्रजरानी ब्रजरसखानी।

राधारानी की दीवानी उमा रमा बानी।

मेरी राधारानी सी रँगीली राधारानी।

मेरी राधारानी सी छबीली राधारानी।

मेरी राधारानी सी रसीली राधारानी।

राधारानी छवि लखि मोहें राधारानी।

परब्रह्म करें राधारानी अगवानी।

ब्रह्म श्याम बोलें “जय हो जय हो” राधारानी।

सर्वव्यापक रोता ढ़ूँढे राधारानी।

आनँदघन रोये बिनु राधारानी।

कोटि कमला भवानी याय नौकरानी।

मेरी राधारानी सम मेरी राधारानी।

मेरी ठकुरानी महरानी राधारानी।

प्रेम के भिखारी हरि दाता राधारानी।

ब्रह्म करे राधारानी जू की अगवानी।

परमात्मा की आत्मा हैं राधारानी।

जग भजै हरि हरि भजें राधारानी।

जग ठाकुर चाकर राधारानी।

Source page 122

चलें हरि आगे सखि, आगे राधारानी।

राधारानी भृकुटिन डरें चक्रपानी।

हरि नीचे दृग करि देखे राधारानी।

जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो राधारानी।

मेरी राधारानी सी “कृपालु” राधारानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३070
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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