कीर्तन 51–100
कीर्तन 66 · Kirtan 66
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी राधारानी प्रेमरूप रसखानी।
मेरी राधारानी प्रेमरूप रसखानी।
Source page 121
राधारानी मेरी स्वामिनि अब जानी।
राधारानी की दीवानी उमा रमा बानी।
मेरी राधारानी सी रँगीली राधारानी।
मेरी राधारानी सी छबीली राधारानी।
मेरी राधारानी सी रसीली राधारानी।
राधारानी छवि लखि मोहें राधारानी।
परब्रह्म करें राधारानी अगवानी।
ब्रह्म श्याम बोलें “जय हो जय हो” राधारानी।
सर्वव्यापक रोता ढ़ूँढे राधारानी।
मेरी राधारानी सम मेरी राधारानी।
प्रेम के भिखारी हरि दाता राधारानी।
ब्रह्म करे राधारानी जू की अगवानी।
Source page 122
चलें हरि आगे सखि, आगे राधारानी।
राधारानी भृकुटिन डरें चक्रपानी।
हरि नीचे दृग करि देखे राधारानी।
