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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 45 · 49/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 45 · Kirtan 45

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 98–99PDF 109–110

प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी प्यारी

(कुंज कदंबनि डार)

प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी प्यारी

तोपै बलिहारी बलिहारी बलिहारी प्यारी।

तू ही मेरी गति मति रति सुकुमारी प्यारी,

पाछा नहिं छोड़ूँ अपनाये चाहे मारे प्यारी।

तू तो बिनु कारण कृपा करे नित प्यारी,

कभु अपनावोगी भरोसा भारी उर प्यारी।

शिशु नवजात न जाने निज माँ को प्यारी,

माँ ही तो जनावे वाय मैं ही तेरी माँ हूँ प्यारी।

शरण शरण मैं तो शरण तिहारी प्यारी,

जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी प्यारी।

मेरी ऐसी भोरी भारी भानुदुलारी प्यारी,

जापै जायँ पूर्ण ब्रह्म बनवारी वारी वारी।

जापै जग वारी सोउ बनवारी वारी प्यारी,

कहँ लौ कह तोपै तू भी जायँ वारी वारी।

जब जब निकसत ब्रज में सवारी प्यारी,

पाछे चलि बनवारी बोले जय हो जय हो प्यारी।

Source page 99

सोरहो सिंगार करि बैठे जब नथवारी,

पिय लखें इकटक बोले बलिहारी प्यारी।

नज़र लगे ना पी की मेरी भोरी भारी प्यारी,

देयँ ““कृपालु”” दौरी काला टीका माथे प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३049
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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