कीर्तन 1–50
कीर्तन 45 · Kirtan 45
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी प्यारी
प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी प्यारी
तोपै बलिहारी बलिहारी बलिहारी प्यारी।
तू ही मेरी गति मति रति सुकुमारी प्यारी,
पाछा नहिं छोड़ूँ अपनाये चाहे मारे प्यारी।
तू तो बिनु कारण कृपा करे नित प्यारी,
कभु अपनावोगी भरोसा भारी उर प्यारी।
शिशु नवजात न जाने निज माँ को प्यारी,
माँ ही तो जनावे वाय मैं ही तेरी माँ हूँ प्यारी।
शरण शरण मैं तो शरण तिहारी प्यारी,
जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी प्यारी।
मेरी ऐसी भोरी भारी भानुदुलारी प्यारी,
जापै जायँ पूर्ण ब्रह्म बनवारी वारी वारी।
जापै जग वारी सोउ बनवारी वारी प्यारी,
कहँ लौ कह तोपै तू भी जायँ वारी वारी।
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सोरहो सिंगार करि बैठे जब नथवारी,
पिय लखें इकटक बोले बलिहारी प्यारी।
