कीर्तन 101–125
कीर्तन 112 · Kirtan 112
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
बरसाने वारी
मेरी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी।
मेरी ब्रजरस बरसाने वारी प्यारी।
जय हो जय हो प्यारी, जय हो जय हो प्यारी।
जाके पाछे पाछे डोले ब्रह्म बनवारी।
मोहिं महल टहलिनि बना दे प्यारी।
जाके डर डरे सोइ डरे लखि प्यारी।
जय हो जय हो जय हो भानुदुलारी प्यारी।
बने प्रेम भिखारी पिय दाता प्यारी।
रो के प्यारी को पुकारो भाजी अइहैं प्यारी।
मेरी प्यारी जैसी प्यारी नहिं कोऊ प्यारी।
पिय देय बुहारी तित जित जाय प्यारी।
पिय सिट्टी पिट्टी भूलें लखि रूठीं प्यारी।
