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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 112 · 116/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 112 · Kirtan 112

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 178PDF 189

बरसाने वारी

(हमारी राधे जू)

बरसाने वारी

मेरी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी।

मेरी ब्रजरस बरसाने वारी प्यारी।

जय हो जय हो प्यारी, जय हो जय हो प्यारी।

जाके पाछे पाछे डोले ब्रह्म बनवारी।

मोहिं महल टहलिनि बना दे प्यारी।

जाके चरण पलोटत बनवारी।

जाके डर डरे सोइ डरे लखि प्यारी।

जय हो जय हो जय हो भानुदुलारी प्यारी।

बने प्रेम भिखारी पिय दाता प्यारी।

रो के प्यारी को पुकारो भाजी अइहैं प्यारी।

मेरी प्यारी जैसी प्यारी नहिं कोऊ प्यारी।

पिय देय बुहारी तित जित जाय प्यारी।

पिय सिट्टी पिट्टी भूलें लखि रूठीं प्यारी।

पिय को बुरा न कहो बुरा माने प्यारी।

पिय माँगे कृपा ऐसी है “कृपालु” प्यारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३116
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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