कीर्तन 101–125
कीर्तन 106 · Kirtan 106
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,
मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,
जाकी करे पूर्ण ब्रह्म श्याम अगवानी।
जाके पाछे पाछे डोलें सारँगपानी।
मेरी राधारानी प्रेमरूप रसखानी,
जय हो जय हो जय हो वृंदावन ठकुरानी।
मेरी ऐसी राधारानी, ब्रज ठकुरानी,
जेहि हरि ने भी निज स्वामिनि मानी।
अब लौं रही मैं अनजानी अब जानी,
मेरी तो है गति मति रति राधेरानी।
तू तो सदा ते “कृपालु” अवढ़रदानी,
काहे अब राधारानी करो आना कानी।।
श्यामा श्याम श्यामा श्याम श्यामा श्याम श्यामा श्याम,
गावो नित श्यामा श्याम, ध्यावो नित श्यामा श्याम।
Source page 171
हँसो भी तो श्यामा श्याम, रोवो भी तो श्यामा श्याम,
जागो भी तो श्यामा श्याम, सावोे भी तो श्यामा श्याम।
पूरब भी तो श्यामा श्याम, पश्चिम भी तो श्यामा श्याम।
उत्तर भी तो श्यामा श्याम, दक्षिण भी तो श्यामा श्याम।
