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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 106 · 110/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 106 · Kirtan 106

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 170–171PDF 181–182

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

(मेरे नंदनन्दन .....)

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी,

जाकी करे पूर्ण ब्रह्म श्याम अगवानी।

मेरी ऐसी राधेरानी ब्रजरसखानी,

जाके पाछे पाछे डोलें सारँगपानी।

मेरी राधारानी प्रेमरूप रसखानी,

जय हो जय हो जय हो वृंदावन ठकुरानी।

मेरी ऐसी राधारानी, ब्रज ठकुरानी,

जेहि हरि ने भी निज स्वामिनि मानी।

अब लौं रही मैं अनजानी अब जानी,

मेरी तो है गति मति रति राधेरानी।

तू तो सदा ते “कृपालु” अवढ़रदानी,

काहे अब राधारानी करो आना कानी।।

श्यामा श्याम श्यामा श्याम श्यामा श्याम श्यामा श्याम,

गावो नित श्यामा श्याम, ध्यावो नित श्यामा श्याम।

आओ भी तो श्यामा श्याम, जाओ भी तो श्यामा श्याम,

पावो भी तो श्यामा श्याम, खोवो भी तो श्यामा श्याम।

Source page 171

हँसो भी तो श्यामा श्याम, रोवो भी तो श्यामा श्याम,

जागो भी तो श्यामा श्याम, सावोे भी तो श्यामा श्याम।

पूरब भी तो श्यामा श्याम, पश्चिम भी तो श्यामा श्याम।

उत्तर भी तो श्यामा श्याम, दक्षिण भी तो श्यामा श्याम।

ऊपर भी तो श्यामा श्याम, नीचे भी तो श्यामा श्याम।

भीतर भी तो श्यामा श्याम, बाहर भी तो श्यामा श्याम।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३110
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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