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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 108 · 112/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 108 · Kirtan 108

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 172–173PDF 183–184

मेरो प्यारो प्यारो प्यारो मुरली वारो,

(भोरी भोरी मोरी ...)

मेरो प्यारो प्यारो प्यारो मुरली वारो,

जय हो जय हो जय हो वो तो प्राण हमारो।

नीलो नीलो तनु पीलो पीलो पट वारो,

जय हो जय हो जय हो वो तो नैनन तारो।

जशोदा ललन तो है एतिक प्यारो,

गोपीजन दृग अंजन करि डारो।

कहा कहूँ मेरो प्यारो एतिक प्यारो,

उमा रमा पातिव्रत धर्म बिसारो।

कैसे बताऊँ प्यारो ऐतिक प्यारो,

प्यारो चह देखन प्यारी तनु धारो।

प्यारो कारो तन कारी कामरि वारो,

प्यारो कंध कनक लकुटिया धारो।

प्यारो रास हित शिव गोपी तनु धारो,

प्यारो लखि रमा रमापतिहुँ बिसारो।

प्यारो निज छवि लखि मोह्यो आपु प्यारो,

प्यारो मोहे सब जग प्यारी मोहीं प्यारो।

Source page 173

प्यारो पावे प्यारी रस प्यारी रस प्यारो,

हम बड़भागी पावें रस प्यारी प्यारो।

प्यारो कह प्यारी बड़ प्यारी कह प्यारो,

कहत “कृपालु” दोउ एक प्यारी प्यारो।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३112
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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