कीर्तन 51–100
कीर्तन 88 · Kirtan 88
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी,
जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी,
तू तो है कृपा की मूरति सुकुमारी,
मोको तो है तेरा ही भरोसा भारी प्यारी।
मो सो न भिखारी तोसो दाता नहीं प्यारी,
दे दे दे दे दे दे भीख गोपी प्रेम प्यारी।
तू ही मेरी थी भी है भी रहेगी भी प्यारी,
शिशु नवजात न जाने माँ को प्यारी,
माँ ही तो जनावे वाय मैं हूँ महतारी।
तेरी महिमा को कौन जानि सक प्यारी,
तेरे तो हैं सब जन खरे खरे प्यारी,
मो खोटे की तो है तू ही इक प्यारी।
Source page 146
तेरे रोम रोम चुवे ब्रजरस प्यारी,
पियें नित बनवारी सोइ रस प्यारी।
तेरे रोम रोम चुवे ब्रजरस प्यारी,
तेरा सुत प्यासा दे दे बूँद इक प्यारी।
नाम है “कृपालु” मेरा झूठेहि प्यारी,
कृपा करि साँचु करु नाम सुकुमारी।।
रसिक रँगीली राधे, प्रेम अगाधे,
गुन गर्वीली राधे, प्रेम अगाधे,
