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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 88 · 92/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 88 · Kirtan 88

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

29 source linesपुस्तक पृष्ठ 145–146PDF 156–157

जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी,

(अपनापन रखना .....)

जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी,

शरण शरण मैं तो शरण तिहारी।

तू तो है कृपा की मूरति सुकुमारी,

मोको तो है तेरा ही भरोसा भारी प्यारी।

मो सो न भिखारी तोसो दाता नहीं प्यारी,

दे दे दे दे दे दे भीख गोपी प्रेम प्यारी।

तू ही मेरी थी भी है भी रहेगी भी प्यारी,

अपनाऊ चाहे ठुकराऊ महतारी।

शिशु नवजात न जाने माँ को प्यारी,

माँ ही तो जनावे वाय मैं हूँ महतारी।

तेरी महिमा को कौन जानि सक प्यारी,

अगनित तनु धरि हारे बनवारी।

तेरे तो हैं सब जन खरे खरे प्यारी,

मो खोटे की तो है तू ही इक प्यारी।

पाछा नहिं छोड़ूँ तेरा भानुदुलारी,

प्यार करे चाहे मारे इच्छा तिहारी।

Source page 146

तेरे रोम रोम चुवे ब्रजरस प्यारी,

पियें नित बनवारी सोइ रस प्यारी।

तेरे रोम रोम चुवे ब्रजरस प्यारी,

तेरा सुत प्यासा दे दे बूँद इक प्यारी।

नाम है “कृपालु” मेरा झूठेहि प्यारी,

कृपा करि साँचु करु नाम सुकुमारी।।

रसिक रँगीली राधे, प्रेम अगाधे,

छैल छबीली राधे, प्रेम अगाधे।

गुन गर्वीली राधे, प्रेम अगाधे,

अति अलबेली राधे, प्रेम अगाधे।

नित्य नवेली राधे, प्रेम अगाधे,

सरस रसीली राधे, प्रेम अगाधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३092
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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