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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 82 · 86/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 82 · Kirtan 82

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 138–139PDF 149–150

जय जय कुंज विहारिणि राधे,

(गोविन्द जय जय . . .)

जय जय कुंज विहारिणि राधे,

जय जय करु णाकारिणी राधे।

मनमोहन मनहारिणी राधे,

सँग अगनित वनचारिणि राधे।

शरणागत भवतारिणि राधे,

अवतारण अवतारिणि राधे।

कलि प्रभाव संहारिणि राधे,

प्रेमानंद प्रसारिणि राधे।

त्रिगुण त्रिताप विदारिणि राधे,

ब्रज ब्रजरस विस्तारिणि राधे।

चाल मरालनहारिणि राधे,

कुंज निकुंज विहारिणि राधे।

जय “कृपालु” उरधारिणि राधे,

जय प्रणतारति हारिणि राधे।।

Source page 139

जय जय नथ बेसर वारी राधे,

जय वृषभानुदुलारी राधे।

जय जय रस बेचन वारी राधे,

श्री बरसाने वारी राधे।

भजु मन निशिदिन छिन छिन राधे,

हरिहूँ रह आधे बिनु राधे।

जो कोउ कहत बार इक राधे,

हरि कह आय कहहु पुनि राधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३086
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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