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जय जय कुंज विहारिणि राधे,
(गोविन्द जय जय . . .)
जय जय कुंज विहारिणि राधे,
जय जय करु णाकारिणी राधे।
मनमोहन मनहारिणी राधे,
सँग अगनित वनचारिणि राधे।
शरणागत भवतारिणि राधे,
अवतारण अवतारिणि राधे।
कलि प्रभाव संहारिणि राधे,
प्रेमानंद प्रसारिणि राधे।
त्रिगुण त्रिताप विदारिणि राधे,
ब्रज ब्रजरस विस्तारिणि राधे।
चाल मरालनहारिणि राधे,
कुंज निकुंज विहारिणि राधे।
जय “कृपालु” उरधारिणि राधे,
जय प्रणतारति हारिणि राधे।।
Source page 139
जय जय नथ बेसर वारी राधे,
जय वृषभानुदुलारी राधे।
जय जय रस बेचन वारी राधे,
श्री बरसाने वारी राधे।
भजु मन निशिदिन छिन छिन राधे,
हरिहूँ रह आधे बिनु राधे।
जो कोउ कहत बार इक राधे,
हरि कह आय कहहु पुनि राधे।
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