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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 4 · 8/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 4 · Kirtan 4

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 4–5PDF 15–16

मेरे गुरु वर मेरे गिरिधर प्यारे,

(गुरु ः कृपालुर्मम शरणं . . .)

मेरे गुरु वर मेरे गिरिधर प्यारे,

दोउ एकहिं हो न सपनेहुँ न्यारे।

हरि की कृपा ते मिले गुरु वर प्यारे,

गुरु की कृपा ते मिले गिरिधर प्यारे।

Source page 5

गिरिधर तो हैं प्राण हमारे,

गुरु वर मेरे प्राण पियारे।

जोइ गुरु वर सोइ गिरिधर प्यारे,

दुहुँन भूलिहूँ न मानहु न्यारे।

गुरु वर महँ रह गिरिधर प्यारे,

गिरिधर महँ रह गुरु वर प्यारे।

गुरु वर आत्मा गिरिधर प्यारे,

गिरिधर आत्मा गुरु वर प्यारे।

गुरु वर कह भज गिरिधर प्यारे,

गिरिधर कह भज गुरु वर प्यारे।

गुरु वर कह बड़ गिरिधर प्यारे,

गिरिधर कह बड़ गुरु वर प्यारे।

निर्मल मन चह गिरिधर प्यारे,

निर्मल मन कर गुरु वर प्यारे।

गुरु वर गिरिधर सँग भजु प्यारे,

या गुरु वर को ही भज प्यारे।

मम गुरु वर मम गिरिधर प्यारे,

दोउ “कृपालु” रहु हृदय हमारे।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३008
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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