लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 42 · 46/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 42 · Kirtan 42

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

14 source linesपुस्तक पृष्ठ 95PDF 106

मेरी राधेरानी ठाकुरहूँ की ठकुरानी।

(कुंज कदंबनि डार . . .)

मेरी राधेरानी ठाकुरहूँ की ठकुरानी।

मेरी राधेरानी महरानीहुँ की महरानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप ब्रजरस खानी।

मेरी राधेरानी ब्रजरानी अवढर दानी।

मेरी राधेरानी की दिवानी वानी रु द्रानी।

मेरी राधेरानी जू की वृंदावन रजधानी।

मेरी राधेरानी सारे ब्रज की हैं ठकुरानी।

मेरी राधेरानी जू की करें हरि अगवानी।

मेरी राधेरानी सम दानी मेरी राधारानी।

मेरी राधेरानी मेरी ठकुरानी अब जानी।

मेरी राधेरानी अंश कोटि कमला भवानी।

मेरी राधेरानी जू के पग चापैं चक्रपानी।

मेरी राधेरानी सी “कृपालु” मेरी राधारानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३046
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text