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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 1 · 5/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 1 · Kirtan 1

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

10 source linesपुस्तक पृष्ठ 1PDF 12

मेरे गुरु वर प्यारे, मेरे गिरिधर प्यारे।

(राधे राधे गोविंदा . . .)

मेरे गुरु वर प्यारे, मेरे गिरिधर प्यारे।

जोइ गुरु वर प्यारे, सोइ गिरिधर प्यारे।

भज गुरु वर प्यारे, भज गिरिधर प्यारे।

जहँ गुरु वर प्यारे, तहँ गिरिधर प्यारे।

उर गुरु धर प्यारे, उर हरि धर प्यारे।

जय हो गुरु वर प्यारे, जय हो गिरिधर प्यारे।

गुरु भज हरि प्यारे, हरि भज गुरु प्यारे।

गुरु कह हरि प्यारे, हरि कह गुरु प्यारे।

कह “कृपालु” प्यारे दोउ कृपालु प्यारे॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३005
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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